Etawah News: तहसील भरथना में कथित रिश्वतखोरी और अभद्र व्यवहार का मामला, आजाद समाज पार्टी का.ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
नामांतरण प्रकरण में कथित ₹3,000 की रिश्वत मांगने का आरोप, छह प्रमुख मांगों के साथ निष्पक्ष कार्रवाई की उठाई आवाज
रिपोर्ट एम एस वर्मा मनोज कुमार TTN 24 NEWS
भरथना, इटावा। आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के तत्वावधान में पार्टी के इटावा जिलाध्यक्ष एवं अधिवक्ता एडवोकेट सुंदरम सिंह बौद्ध ने गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को तहसील भरथना के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को ज्ञापन सौंपकर राजस्व न्यायालय में कथित रिश्वत मांगने, अभद्र व्यवहार करने तथा मारपीट का प्रयास किए जाने के मामले में कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में नामांतरण प्रकरण से संबंधित कथित अनियमितताओं और राजस्व न्यायालय के सरकारी कार्यों में निजी व्यक्तियों के हस्तक्षेप का मुद्दा भी उठाया गया।
मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को संबोधित ज्ञापन में एडवोकेट सुंदरम सिंह बौद्ध ने नामांतरण प्रकरण संख्या 9536/2026 का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि निर्धारित तिथि 23 सितंबर 2026 को प्रकरण को बिना स्पष्ट एवं उचित कारण बताए खारिज कर दिया गया था।

ज्ञापन के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 को दोपहर लगभग 1:30 बजे नामांतरण प्रकरण के संबंध में रजिस्ट्रार कानूनगो अनिल यादव एवं निजी व्यक्ति वीरेंद्र कुमार द्वारा कथित रूप से ₹3,000 की रिश्वत मांगी गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब उन्होंने कथित रिश्वत की मांग का विरोध किया, तो उनके साथ गाली-गलौज एवं अभद्र व्यवहार किया गया और मारपीट का प्रयास भी किया गया।
एडवोकेट सुंदरम सिंह बौद्ध ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की।
राजस्व न्यायालय में निजी व्यक्तियों के हस्तक्षेप पर उठाए सवाल

ज्ञापन में तहसील भरथना के राजस्व न्यायालय में सरकारी कार्यों के दौरान निजी व्यक्तियों के कथित अनधिकृत हस्तक्षेप पर भी सवाल उठाए गए। जिलाध्यक्ष ने मांग की कि राजस्व न्यायालय के कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए तथा सरकारी कार्यों में अनधिकृत रूप से हस्तक्षेप करने वाले व्यक्तियों को हटाया जाए। इसके साथ ही रिक्त पदों पर योग्य एवं अधिकृत सरकारी कर्मचारियों की तैनाती की मांग की गई।
ज्ञापन में छह प्रमुख मांगें रखीं
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की ओर से सौंपे गए ज्ञापन में निम्नलिखित मांगें प्रमुखता से उठाई गईं—
1. रजिस्ट्रार कानूनगो के विरुद्ध कार्रवाई: अनिल यादव पर लगाए गए कथित रिश्वत मांगने, अभद्र व्यवहार करने एवं मारपीट का प्रयास करने के आरोपों पर निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए एक माह के निलंबन की मांग की गई।
2. निजी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई: वीरेंद्र कुमार द्वारा राजस्व न्यायालय के सरकारी कार्यों में कथित अनधिकृत हस्तक्षेप पर रोक लगाकर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
3. अनधिकृत निजी व्यक्तियों को हटाना: तहसील भरथना के राजस्व न्यायालय में सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप करने वाले अनधिकृत निजी व्यक्तियों को हटाया जाए तथा रिक्त पदों पर योग्य एवं अधिकृत सरकारी कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
4. नामांतरण प्रकरण का निस्तारण: नामांतरण प्रकरण संख्या 9536/2026 में नियमानुसार कार्रवाई करते हुए प्रकरण का निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
5. शिकायतकर्ता को न्याय एवं सुरक्षा: कथित अभद्र व्यवहार, धमकी और मारपीट के प्रयास के मामले में निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की जाए तथा भविष्य में किसी भी प्रकार के दबाव, धमकी या उत्पीड़न से सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
6. संबंधित कानूनों के अंतर्गत कार्रवाई: मामले के तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर यदि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 अथवा अन्य संबंधित कानूनों के प्रावधान लागू होते हैं, तो उनके अंतर्गत नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इनमें किसान मोर्चा के जिला संयोजक राजीव यादव, मनीष शाक्य, महिला मोर्चा की जिला संयोजक डिंपल चक, पूर्व जिला महासचिव राघवेंद्र सिंह, विधानसभा अध्यक्ष योगेश कुमार तथा जसवंतनगर विधानसभा अध्यक्ष अंशुल आजाद शामिल रहे।
इसके अतिरिक्त पार्टी के अन्य पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं लगभग आधा सैकड़ा लोग उपस्थित रहे। सभी ने प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित करने तथा राजस्व न्यायालय में पारदर्शी व्यवस्था बनाए रखने की मांग का समर्थन किया।
पारदर्शी प्रशासन और जवाबदेही की मांग
एडवोकेट सुंदरम सिंह बौद्ध ने प्रशासन से राजस्व न्यायालयों में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिकों के सम्मान को प्राथमिकता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यालयों में कार्य करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी है कि वे नियमों के अनुसार कार्य करें और आम नागरिकों को न्याय पाने में अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
उन्होंने उम्मीद जताई कि उपजिलाधिकारी महोदय ज्ञापन में उठाए गए सभी मुद्दों पर उचित संज्ञान लेकर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
