Etawah News: चौ. सुघर सिंह वर्ल्ड स्कूल में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

Etawah News: चौ. सुघर सिंह वर्ल्ड स्कूल में कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

 

आधुनिक तकनीक से शिक्षण को प्रभावी बनाने पर दिया जोर, शिक्षकों एवं स्टाफ को एआई के उपयोग की दी गई जानकारी

रिपोर्ट एम एस वर्मा मनोज कुमार TTN 24 NEWS

जसवंतनगर, इटावा। चौ. सुघर सिंह वर्ल्ड स्कूल में सहोदया के तत्वावधान में शिक्षकों एवं विद्यालय के समस्त स्टाफ के व्यावसायिक विकास के उद्देश्य से कम्प्यूटेशनल थिंकिंग एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की समझ विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों और स्टाफ को आधुनिक तकनीक, तार्किक चिंतन, समस्या समाधान तथा शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को बदलते शैक्षणिक परिवेश और आधुनिक तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना था, ताकि वे नवीन तकनीकों का उपयोग कर शिक्षण प्रक्रिया को अधिक सरल, रोचक और प्रभावशाली बना सकें।

प्रशिक्षण सत्र के दौरान विशेषज्ञ श्री मनोज एम.एस. एवं श्री एन.के. शर्मा ने कम्प्यूटेशनल थिंकिंग की अवधारणा और उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने शिक्षकों को तार्किक ढंग से समस्याओं का विश्लेषण करने, उन्हें छोटे-छोटे भागों में विभाजित करने तथा उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से समाधान खोजने की तकनीकों से परिचित कराया। साथ ही, शिक्षण कार्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग और आधुनिक डिजिटल साधनों की भूमिका को भी समझाया।

कार्यक्रम में सीबीएसई के डीटीसी डॉ. कैलाश चंद्र यादव की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि वर्तमान समय में तकनीकी ज्ञान शिक्षकों के व्यावसायिक विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। एआई जैसी आधुनिक तकनीकों की समझ शिक्षकों को पाठ्य सामग्री तैयार करने, विषयों को बेहतर तरीके से समझाने तथा विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता कर सकती है।

विशेषज्ञों ने बताया कि कम्प्यूटेशनल थिंकिंग केवल कंप्यूटर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दैनिक जीवन और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को व्यवस्थित तथा तार्किक तरीके से हल करने की क्षमता विकसित करती है। वहीं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उचित उपयोग शिक्षण को अधिक संवादात्मक और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने में सहायक हो सकता है। इन तकनीकों के माध्यम से विद्यार्थियों में रचनात्मकता, तार्किक क्षमता, विश्लेषणात्मक सोच और समस्या समाधान कौशल विकसित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई।

संस्था के प्रबंध निदेशक श्री अनुज मोंटी यादव ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन शिक्षकों एवं समस्त स्टाफ को नई तकनीकों से जोड़ने के साथ-साथ विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान और अनुभवों को कक्षा-कक्ष तथा विद्यालयीन कार्यों में प्रभावी रूप से लागू करने का आह्वान किया।

विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. यादव भरत सिंह कानसिंह ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को शिक्षकों एवं स्टाफ के ज्ञान और कौशल में वृद्धि करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में नवीन तकनीकों की जानकारी और उनका उचित उपयोग आवश्यक है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को नई शिक्षण पद्धतियों को अपनाने तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रेरित करते हैं।

कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षकों एवं विद्यालय के समस्त स्टाफ को आधुनिक तकनीक के प्रति जागरूक करने, व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने और शिक्षा व्यवस्था को समय के अनुरूप विकसित करने का संदेश दिया गया। इस प्रकार के आयोजन बदलते शैक्षणिक परिवेश में विद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में उपयोगी साबित हो सकते हैं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *