फर्जी अनुमति और भूमि अतिक्रमण के खिलाफ नगर पंचायत गुंडरदेही प्रशासन व पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

फर्जी अनुमति और भूमि अतिक्रमण के खिलाफ नगर पंचायत गुंडरदेही प्रशासन व पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल।

 

ब्यूरो चीफ TTN 24 NEWS

गुंडरदेही। नगर पंचायत गुंडरदेही में बिना पट्टे की जांच किए निर्माण/कार्य की अनुमति देने का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि नगर पंचायत अध्यक्ष और मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) ने राजनीतिक दबाव और कांग्रेस विधायक कुंवर सिंह निषाद को खुश करने के उद्देश्य से नियमों को ताक पर रखकर यह अनुमति जारी की है।

मामले की सच्चाई जानने के लिए जब स्थानीय पत्रकारों ने CMO से फोन पर संपर्क किया, तो उन्होंने नगर पंचायत अध्यक्ष प्रमोद जैन को ही पहचानने से साफ इनकार कर दिया। प्रशासनिक अधिकारी का अपने ही निकाय के जन-प्रतिनिधि को पहचानने से मुकरना पूरे मामले में बड़े झोल और लीपापोती की ओर इशारा करता है। साथ ही बड़े बड़े गड्ढे से जन पशु हानि की बड़ी संभावना है

*काली माता मंदिर की जमीन पर गिद्ध दृष्टि*

स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि पवित्र काली माता मंदिर की जमीन को हड़पने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। आरोप है कि मिशनरी समाज से जुड़ा एक व्यक्ति लगातार हिंदू धर्म की आस्था को आघात पहुँचाने और धार्मिक जमीनों पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है, जिसे स्थानीय प्रशासन और नेताओं का मूक समर्थन प्राप्त है।

*पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल: SI साहू पर कार्रवाई की मांग*

प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ गुंडरदेही थाना की निष्पक्षता भी कठघरे में है। पुलिस विभाग में पदस्थ SI साहू पर आरोप है कि वे कांग्रेस विधायक के इशारों पर काम कर रहे हैं और थाने में आम नागरिकों को धमकाने का काम करते हैं। SI साहू द्वारा विधायक के चरण स्पर्श करने का मामला भी सामने आया है, जो पुलिस की निष्पक्ष छवि पर गहरा दाग है।

क्षेत्रीय जनता और धार्मिक संगठनों ने पुलिस महानिदेशक (DG, रायपुर) एवं गृह मंत्री छः ग शासन से गुहार लगाई है कि विधायक के दबाव में काम करने वाले और पद की गरिमा तार-तार करने वाले SI साहू के खिलाफ तत्काल कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

नगरवासी अब यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि धार्मिक आस्था से खिलवाड़ करने वालों और भू-माफियाओं को संरक्षण देने वाले अधिकारियों व नेताओं पर शासन-प्रशासन कब तक लगाम कसता है।

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