बारडोली शुगर फैक्ट्री के चुनाव अधिकारी पर सरकार के कहने पर प्रेसिडेंट और वाइस प्रेसिडेंट के चुनाव के मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप: अगर देरी हुई तो किसान डायरेक्टर्स के साथ मिलकर भूख हड़ताल का बिगुल बजाएंगे

TTN 24न्यूज

ब्युरोचीफ, शैलेन्द्रसिंह बारडोली गुजरात

 

बारडोली शुगर फैक्ट्री के चुनाव अधिकारी पर सरकार के कहने पर प्रेसिडेंट और वाइस प्रेसिडेंट के चुनाव के मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप: अगर देरी हुई तो किसान डायरेक्टर्स के साथ मिलकर भूख हड़ताल का बिगुल बजाएंगे!!

 

बारडोली शुगर मिलमे सलोसे किसानों को सुनहरे सपने दिखाकर संस्था को लुटकर किसानोकी एकभी नहीं सुनने वाले राजकीय अड्डा बनानेकी मंछा किसानो ने पुरी नहीं होने दी साथ इस चुनावमे भुमि पुत्रोंने ऐसे लोगो को घरका रास्ता दिखा दिया।

 

डायरेक्टर्स के कलेक्टर और प्रोविंशियल ऑफिसर को लिखित देने के बाद भी देरी होती है, तो बारडोली शुगर मिल के मेंबर्स और डायरेक्टर्स के ज़ोरदार तरीके से भूख हड़ताल पर बैठने का ऐलान देने के बाद सरकार के कहने पर काम करने वाला अधिकारी डायरेक्टरों ने लिखित मांग जिम्मेवार अफसर कितनी गंभीरता से लेगा?।

 

एशिया खंडमें सबसे बड़ी बारडोली शुगर फैक्ट्री के चुनाव हाल ही में पूरे हुए हैं। नए डायरेक्टर्स को किसान मेंबर्स ने बहुमत से चुना है। लेकिन बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स बनने के बाद अब सबका ध्यान ऑर्गनाइज़ेशन के लीडर यानी प्रेसिडेंट और वाइस प्रेसिडेंट के चुनाव पर है। चूंकि एडमिनिस्ट्रेशन इस चुनाव प्रोसेस में बहुत ज़्यादा देरी कर रहा है, इसलिए अब कोऑपरेटिव पॉलिटिक्स में काफ़ी गर्मी है।

 

सोमवार को बारडोली शुगर फैक्ट्री के नए चुने गए डायरेक्टर्स ने सूरत कलेक्टर और इलेक्शन ऑफिसर, यानी बारडोली प्रोविंशियल ऑफिसर से मिलकर एक लिखा हुआ रिप्रेजेंटेशन दिया। इस रिप्रेजेंटेशन में वो बात पर खास तौर पर ज़ोर दिया गया कि शुगर फैक्ट्री का अगला पिलाई सीजन जल्द ही शुरू होने वाली है। ऑर्गनाइज़ेशन को ठीक से चलाने, ज़रूरी एडमिनिस्ट्रेटिव कामों/और एडवांस प्लानिंग के लिए प्रेसिडेंट और वाइस प्रेसिडेंट का अपॉइंटमेंट बहुत ज़रूरी है। अगर इस प्रोसेस में और देरी हुई, तो इसका सीधा असर पेराई सीजन की तैयारियों और किसानों के हितों पर पड़ सकता है।

 

सिस्टम को रिप्रेजेंट कर रहे डायरेक्टर्स ने साफ़ रेड अलर्ट अल्टीमेटम दिया है कि अगर अगले एक हफ़्ते में प्रेसिडेंट और वाइस प्रेसिडेंट पद के लिए ऑफिशियली एक्शन नहीं लिया गया, तो उन्होंने लोकल किसानों और मेंबर्स के साथ मिलकर ज़ोरदार भूख हड़ताल करने का ऐलान करदिया है।

 

अगर सरकार की कोऑपरेटिव सोसाइटी में पॉलिटिकल तरीकों से घुसने की खुली मंशा पूरी होती है, तो किसानों के साथ हो रहा अन्याय उनकी आंखों के सामने आज है और अगर पॉलिटिकल एजेंट किसान मेंबर की मानी जाने वाली कोऑपरेटिव सोसाइटी में मैंडेट सिस्टम लागू करते हैं, तो सरकार किसानों की हालत इतनी मजबुर करदेगी की आनेवाले दिनोमे पुरा पोलिटिकल संस्था बनकर किसानों को पायमाल करनेकी एक साजिश जो भूमिपुत्रों को हरगीज मंज़ूर नहीं है आने वाले दिनों में, मैंडेट सिस्टम कभी भी किसानों से बनी कोऑपरेटिव सोसाइटी में राजकीय प्रदूषण घुस नहीं पाएगा।

 

सायन शुगर के बाद, किसान कभी भी सरकार को बारडोली में अपने चहितो को मैंडेट देकर संस्थाको लुटकर किसानों का शोषण की मंछा किसानों कभी पुरी नहीं होने देंगे ओर अपनी पॉलिसी में कामयाब नहीं होने देंगे। मौजूदा हालात से यह साफ़ हो गया है कि बारडोली समेत पूरा साउथ सहकारी क्षेत्र से लेकर राजकीय मौजूदा घटनाक्रम से प्रभावित होगा। गुजरात के कोऑपरेटिव और पॉलिटिकल पार्टी का इरादा में भारी हंगामे के बीच, सरकार ने अपनी बेताब कोशिशें जारी रखी हैं फिरभी सफल नहीं होंगे अभी तो जिम्मेवार अधिकारी सरकार की कठपुतली बनकर सिस्टम चला रहे हैं। वो कितने दिनों तक चलेगा?

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