ताजनापुर परियोजना के ट्रायल रन से सूखे नदी-नालों में बहने लगा पानी; किसानों के चेहरों पर लौटी उम्मीद

सूखे की तपिश के बीच ‘गीली’ उम्मीद!

ताजनापुर परियोजना के ट्रायल रन से सूखे नदी-नालों में बहने लगा पानी; किसानों के चेहरों पर लौटी उम्मीद

महाराष्ट्र | अहिल्यानगर | लोकेशन—शेवगांव

महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के शेवगांव तहसील में इस समय सूखे जैसे हालात हैं। बारिश ने मुंह मोड़ लिया है, कुएं सूखने की कगार पर हैं और खेतों में खड़ी फसलें पानी के लिए तरस रही हैं। लेकिन इसी सूखे के बीच ताजनापुर जल परियोजना के पानी ने किसानों को उम्मीद की एक नई किरण दिखाई है।

ताजनापुर परियोजना से ट्रायल बेसिस पर छोड़े गए पानी के कारण खानापुर, रावतळे, कुरुडगांव और गदेवाडी इलाके के वडे, नाले और नदी के सूखे पड़े पात्रों में पानी बहने लगा है। बारिश के बिना नदी में बहता पानी देखकर किसान भी कुछ पल के लिए हैरान रह गए। सूखे की तपती जमीन पर पानी की यह धार किसानों के लिए किसी ‘जलसंजीवनी’ से कम नहीं है।

दरअसल, ताजनापुर जल परियोजना का काम पिछले करीब 15 वर्षों से अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ रहा है। चापडगांव तक पाइपलाइन का काम पूरा हो चुका है, जबकि गदेवाडी में उद्भव तैयार किया गया है। जायकवाडी बैकवॉटर से कृषि क्षेत्र को पानी उपलब्ध कराने की योजना है। परियोजना के कुछ हिस्सों का काम अभी भी बाकी है।

मौजूदा सूखे हालात को देखते हुए सामाजिक संस्थाओं और विभिन्न संगठनों ने पूर्ण हो चुके कार्यों के माध्यम से पानी छोड़कर सूखे नदी-नालों को प्रवाहित करने की मांग की थी। इसी मांग के बाद अब ट्रायल के तौर पर पानी छोड़ा गया है।

हर साल बारिश में उफनने वाली गदेवाडी नदी इस बार सूखी पड़ी थी। लेकिन अब इसी नदी के पात्र में पानी बहता देखकर किसानों की उम्मीदों को जैसे फिर से पालवी फुटी है।

रावतळे-कुरुडगांव के किसान नवनाथ सिताराम कराळे कहते हैं कि अगर यह पानी अगले दस-पंद्रह दिनों तक बना रहा, तो आसपास के कुओं का जलस्तर बढ़ सकता है। इससे हाथ में आई फसल को बचाने के साथ अगली फसल की उम्मीद भी जगेगी।

ताजनापुर मध्यम परियोजना उपविभाग क्रमांक-1 के उपविभागीय अधिकारी श्रीहरी कुलकर्णी के मुताबिक, सूखे जैसे हालात को देखते हुए ट्रायल बेसिस पर पानी छोड़ा गया है। इस दौरान पाइपलाइन में लीकेज अथवा किसी तकनीकी समस्या की भी जांच की जा रही है।

यानी बारिश भले ही रूठी हो, लेकिन ताजनापुर के पानी ने सूखी धरती पर उम्मीद की एक नई कहानी जरूर लिखनी शुरू कर दी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *