जिसने बेसहारा या दुखी व्यक्ति की मदद नहीं की वह अमृत के स्वाद से अनजान है : आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

 

जिसने बेसहारा या दुखी व्यक्ति की मदद नहीं की वह अमृत के स्वाद से अनजान है : आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

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“सादर जय सियाराम”

“सच्ची मानवता का संदेश”

सच्चा इंसान वही होता है जो दूसरों के आंसु पोंछना जानता है ।

दूसरों की मदद करने और उनके दर्द को साझा करने से जो आत्मिक सुख (तसल्ली ) मिलती है ।

उसे अमृत कहा गया है , जिसने कभी बेसहारा या दुखी व्यक्ति की मदद नहीं की वह अमृत के स्वाद से अनजान है

यदि हमारे हृदय में किसी दुसरे के प्रति दया , करुणा , और प्रेम नहीं है , तो उसका जीवन अधूरा है ।

[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]

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