क्रिकेट जगत के महान ऑलराउंडर सर गैरी सोबर्स ने जब होश संभाला तो अपने दोनों हाथों में पांच-पांच अंगुलियां और एक-एक अंगूठा देखकर वे जरा भी परेशान नहीं हुए.
सोबर्स ने अपनी जीवनी के पहले अध्याय में इसका विस्तार से उल्लेख किया है. वह लिखते हैं कि “निश्चित रूप से बहुत से लोग यह दावा करते हैं कि मेरी क़िस्मत इसीलिए बहुत अच्छी थी, क्योंकि मेरे हाथों में दो उंगलियां ज़्यादा थी.”
“यह उनकी अपनी सोच तो हो सकती है, लेकिन मैंने इसके बारे में कभी भी ज़्यादा नहीं सोचा था. दोनों हाथों में छह-छह उंगलियों की वजह से मुझे कोई परेशानी नहीं हुई और न ही मेरा कोई काम रुका.”
उनका कहना है कि “वेस्टइंडीज़ में अभी भी बहुत से लोग असामान्य शारीरिक बनावट वाले हैं. मैं ख़ुद एक ऐसे वेस्टइंडीज़ के नागरिक से मिला हूं, उसे भी मेरी तरह दोनों हाथों में अतिरिक्त उंगलियां थीं.”
गैरी सोबर्स ने ये दो अतिरिक्त उंगलियां हमेशा अपने साथ नहीं रहने दी थीं. जब वे नौ या दस वर्ष के थे, तब एक हाथ की अतिरिक्त उंगली को किसी धारदार हथियार पर रखकर काट दिया था. जबकि दूसरे हाथ की अतिरिक्त उंगली को तेज़धार चाकू से काट दिया था, उस समय उनकी उम्र पंद्रह वर्ष थी.
सर गैरी सोबर्स का जन्म 28 जुलाई 1936 को ब्रिजटाउन में हुआ था. उनके पिता कैनेडियन मर्चेंट नेवी में थे. सोबर्स केवल पाँच वर्ष के थे जब जर्मनों ने उनके पिता की नाव को एक हमले में डुबो दिया था.
ओवर में छह छक्के और गेंद ग़ायब
क्रिकेट सोबर्स का पहला शौक़ था जो जुनून बन गया. वह आठ साल के थे जब वह बारबाडोस के वांडरर्स ग्राउंड में स्कोरबोर्ड पर स्कोरिंग करते थे.
स्कोरिंग का फ़ायदा यह हुआ कि उन्होंने उस युग के सभी महान क्रिकेटरों को अपने सामने खेलते हुए देखा, जिनमे विशेष रूप से फ्रैंक वारल, क्लाइड वालकॉट और एवर्टन वीक्स शामिल थे.
