भगवान के भक्तों का सेवक होना , संत का प्रिय होना श्रेष्ठ बात: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
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“सादर जय सियाराम”
भगवान का दास हो अच्छी बात है लेकिन भगवान के दास के दास के दास के दास के दास के दास होना ये अति उत्तम बात है ।
भगवान का भक्त होना तो ठीक है ।
लेकिन भगवान के भक्तों का भक्त होना , भगवान के भक्तों का सेवक होना , संत का प्रिय होना श्रेष्ठ बात है ।
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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