ऋषि-मुनियों संत-महापुरुषों का स्थान तो देवताओं से भी ऊंचा: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
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“सादर जय सियाराम”
जानकारी हमें बताती है कि किताब में क्या लिखा है ,
और ज्ञान हमें बताता है कि जीवन में क्या करना है ।
ऋषि-मुनियों एवं संत-महापुरुषों की दिव्य वाणी
को शिक्षक की साधारण बातों से कभी नहीं जोड़ना चाहिए ,
ऋषि-मुनियों संत-महापुरुषों का स्थान तो देवताओं से भी ऊंचा है ।
उनकी तुलना किसी संसारिक शिक्षक से करना ही अपराध है ।
ऋषि-मुनियों संत-महापुरुषों तो स्वयं भगवान का स्वरुप हैं
और शिक्षक एक संसारिक कर्तव्य निभाने वाला व्यक्ति मात्र है ।
शिक्षक से सिर्फ व सिर्फ जानकारी मिलती है ।
ऋषि-मुनियों संत-महापुरुषों से ज्ञान मिलता है ।
शिक्षक और गुरु में फर्क होता हैं ।
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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