शिष्य के जीवन का स्रोत गुरुदेव होते हैं: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
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“सादर जय सियाराम”
“शिष्य का स्रोत गुरुदेव होते हैं”
जैसे नदी का स्रोत गंगोत्री है ,
बीज का स्रोत धरती है , प्रकाश का स्रोत सूर्य है-
वैसे ही शिष्य के जीवन का स्रोत गुरुदेव होते हैं ।
शिष्य के भक्ति के स्रोत , शिष्य के ज्ञान का स्रोत , शिष्य के आनंद का स्रोत-
केवल व केवल उसके गुरुदेव होते हैं ।
शिष्य चाहें कितना भी आगे बढ़ जाए , उसका स्रोत , उसकी जड़ तो गुरुदेव के चरणों में ही है ।
जड़ से कटा वृक्ष सूख जाता है ।
इसलिए हम सब धन्य हैं जो पूज्य गुरुदेव भगवान जैसे स्रोत के निकट है , जो जुड़े हैं
गुरुदेव का स्रोत शिष्य के लिए कभी सूखता नहीं , गुरुदेव तो “करुणा वरुणालय” हैं ।
गुरुदेव तो करुणा और प्रेम का अनंत समुद्र हैं ।
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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