ईश्वर ने हमें हमारी अपेक्षाओं से भी अधिक दिया: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
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“सादर जय सियाराम”
“समस्त गुरुभक्त , सहयोगी , शुभचिंतक”
विषय: आभार , सीख और आगे की यात्रा के संकल्प के संबंध में ,
सभी को सादर प्रणाम।
आज मन में जो भाव है , उन्हें आप लोगों के साथ साझा करना चाहता हूं ।
1-आभार :
मैं उन सभी लोगों का भी सच्चे हृदय से आभारी हूं ।
जिन्होंने हमारी आलोचना की और आज भी करते हैं ।
जिन्होंने कठिन प्रश्न पूछे ।
क्योंकि हमने आलोचना को हमेशा अवसर के रूप में देखा है ।
आलोचना का उद्देश्य चाहे कुछ भी हो , हमारे लिए भीतर झांकने और स्वयं को बेहतर बनाने का अवसर है ।
2-ईश्वर का आभार :
अंततः ईश्वर का कोटि-कोटि आभार ।
ईश्वर ने हमें हमारी अपेक्षाओं से भी अधिक दिया है ।
अच्छे समय भी दिये है ।
और परीक्षा के समय भी दिए ।
मैं कभी नहीं पूछता कि “यह परीक्षा क्यों आईं ?”
मैं इस बात के लिए आभारी हूं
कि उसने हमें कुछ और सीखने , कुछ और समझने और शायद कुछ और विनम्र बनने का अवसर दिया ।
3-पीछे मुड़कर देखता हूं :
तो मन में केवल तीन भाव आते हैं ।
विनम्रता ,आभार और इस यात्रा से मिली सीख ।
4-आगे का संकल्प :
लेकिन यह रुकने का समय नहीं है ।
आराम करने का समय नहीं है
एक अध्याय विराम हुआ…
परन्तु हमारी यात्रा बहुत लम्बी है ।
और हमारी जिम्मेदारी उससे भी बड़ी है ।
इसलिए आइए ,
इस यात्रा की सीख लेकर और मेहनत करें ।
हर दिन बेहतर बनें ।
और मिलकर “विकसित भारत” के सपने को साकार करें ।
आपका मार्गदर्शक आपके पूज्य गुरुदेव,
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
संपूर्ण भारतवर्ष ,
संपर्क सूत्र:-6396372583,
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