जीवन की सबसे बड़ी सम्पत्ती राम राम, सीताराम है: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
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“सादर जय सियाराम”
सौभाग्य से जिन गुरु चरणों का आश्रय हमें मिला , परम सौभाग्य ये है , कि अपने गुरु परंपरा का अपने गुरुजनों का वो सिद्ध तो इस कोटि के की क्या कहें , लेकिन भजन उस अवस्था में विराजमान होते हुए भी हमारा कोई पुण्य प्रताप नहीं था कि हमको ऐसे गुरु मिले जो दिन-रात केवल सीताराम सीताराम करते हैं ।
मुझे कोई टोना-टोटका बताने वाले गुरु नहीं मिलें कोई तेरे सिर पर हाथ रख दूं , तो तेरा ये काम बन जाय , तेरा फलाना काम बन जाए ये नाटक करने वाले गुरु हमें नहीं मिलें , मुझे तो ऐसे गुरु मिले कि जिसकी जिंदगी सीताराम सीताराम करते हुए बीत गए ,
जीवन की सबसे बड़ी संपत्ती हमसे कोई पूछे तो हम यही कहना चाहते हैं कि जीवन की सबसे बड़ी सम्पत्ती है , सब में बड़ी संपत्ती यह है ऐसे विशुद्ध सब संतो को प्रणाम हम सब तो भकतमाल जी के उपासक है ।
सब संत एक से एक बढ़कर महान पर ऐसे गुरु मिले , ऐसी परंपरा मिली की जिसके रोम-रोम से सीताराम की आसक्ति चुती थी , जिनके एक-एक रोम से सीताराम निकलती थी जैसे कोई उपमा नहीं है मेरे पास ,
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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