इस दुनिया में इतने अच्छे लोग भी पाये जाते हैं : आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
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“सादर जय सियाराम”
आदरणीय श्री सीताराम भक्त परिवार ,
आज आप लोगों के साथ हृदय के कुछ भाव सांझा कर रहा हूं ।
आप अपने जीवन में इतने दयालु बनना कि लोग जब तुमसे मिले तो ये माने कि तुम्हे समाज ने नहीं बनाया ,
तुम्हें कोई ईश्वर ने बनाया ।
उन्हें मिलकर एहसास न हो कि यह दुनिया का हिस्सा है ।
अपितु उन्हें मिलकर ऐसा एहसास हो कि इस दुनिया में इतने अच्छे लोग भी पाये जाते हैं ।
ऐसा नहीं हो सकता , वो तुमसे दुबारा से मिलने की कामना करें , तुम्हें छोड़कर जाने पर विचार करें , आपका व्यक्तित्व इस तरह का होना चाहिए ।
“दया ही सबसे बड़ा आभूषण है”
प्रभु श्रीराम जी का व्यक्तित्व ऐसा ही था ।
मिलने वाला कहता था-
“ये मनुष्य नहीं, साक्षात् ईश्वर हैं”
1-वाणी मिठास , मधुर वचन है औषधि ।
2-हृदय में दया- जो बिना मांगे दूसरों का दर्द समझें ।
3-आचरण- बहुत पवित्र आचरण- जैसा बोलों वैसा करो , जैसा करो वैसा बनो ।
दया , शील और मधुर वाणी ही इंसान को ईश्वर के करीब ले जाती है ।
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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