रिपोर्टर हनु नायक
स्थान दुर्ग
दुर्ग (ग्राम बोरिगरका): श्रीरामचरितमानस गान के समापन अवसर पर धर्मांतरण के मुद्दे पर युवराज पांडेय की खास बातचीत।
ग्राम बोरिगरका में धार्मिक आस्था का समागम; सनातन धर्म और सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने का आह्वान
दुर्ग। ग्राम बोरिगरका (जिला दुर्ग) में आयोजित श्रीरामचरितमानस गान कार्यक्रम का समापन अत्यंत गरिमामय माहौल में हुआ। अंतिम मानस गान के इस विशेष अवसर पर प्रमुख वक्ता श्री युवराज पांडेय के साथ क्षेत्र में बढ़ रहे धर्मांतरण के विषय पर एक खास और गहन बातचीत हुई।
बातचीत के दौरान युवराज पांडेय ने धर्मांतरण को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की और इसे समाज व संस्कृति के लिए एक बड़ा खतरा बताया।
बातचीत के प्रमुख अंश:
सांस्कृतिक जागरूकता की आवश्यकता: युवराज पांडेय ने कहा कि “श्रीरामचरितमानस केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि हमारे जीवन का आधार और संस्कार है। आज समाज के कुछ वर्गों को बहला-फुसलाकर धर्मांतरण की ओर धकेला जा रहा है, जिसे रोकने के लिए हमें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ना होगा।”
धर्मांतरण पर प्रहार: उन्होंने स्पष्ट किया कि छलावे और लालच के दम पर हो रहे धर्मांतरण से सामाजिक ताना-बाना छिन्न-भिन्न हो रहा है। ऐसे प्रयासों को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
सत्संग और रामकथा का महत्व: उन्होंने कहा कि गांवों में नियमित रूप से रामचरितमानस गान और धार्मिक आयोजनों का होना जरूरी है ताकि युवा पीढ़ी और ग्रामीण अपनी आस्था व धर्म के प्रति सजग रहें।
समाज को एकजुट होने की अपील: पांडेय ने बोरिगरका और आसपास के ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने आसपास नजर रखें और धर्म विरोधी गतिविधियों के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों।
कार्यक्रम के अंत में ग्रामवासियों ने मानस मंडली का आभार व्यक्त किया और यह संकल्प लिया कि गांव में सनातन संस्कृति और परंपराओं को अक्षुण्ण रखने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण एवं स्थानीय गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
