पुणे महाराष्ट्र: छात्रों के खून से सने हाथों से लोकमान्य तिलक पुरस्कार दिए जाने का शहर कांग्रेस ने किया विरोध

छात्रों के खून से सने हाथों से लोकमान्य तिलक पुरस्कार दिए जाने का शहर कांग्रेस ने किया विरोध

 

पुणे महाराष्ट्र

 

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों द्वारा किए जा रहे आंदोलन को कुचलने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाठीचार्ज, आंसू गैस तथा पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिसमें अनेक छात्र घायल हुए। शहर कांग्रेस का आरोप है कि इस कार्रवाई के कारण केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथ छात्रों के खून से रंगे हुए हैं।

लोकमान्य तिलक ट्रस्ट द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक पुरस्कार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया था। शहर कांग्रेस का कहना है कि छात्रों पर हुई कार्रवाई के बाद अमित शाह के हाथों से यह पुरस्कार दिलाना लोकमान्य तिलक का अपमान है। इसी के विरोध में पुणे शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने अमित शाह की पुणे यात्रा के दौरान विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।

पुणे शहर जिला कांग्रेस कमेटी ने प्रदर्शन के लिए विधिवत पुलिस से अनुमति मांगी थी। प्रारंभ में पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया, लेकिन कांग्रेस के आग्रह के बाद कार्यक्रम स्थल से एक किलोमीटर की दूरी पर प्रदर्शन की अनुमति दी गई।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में एकत्र होकर “तानाशाह अमित शाह गो बैक”, “अमित शाह मुर्दाबाद”, तथा “अडानी को सम्मान, छात्रों को बेड़ियां” जैसे नारों वाले बैनरों और पोस्टरों के साथ विरोध प्रदर्शन किया।

इस अवसर पर पूर्व विभाग के अध्यक्ष प्रशांत जगताप ने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्र शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से आंदोलन कर रहे थे, लेकिन उन पर अमानवीय ढंग से लाठीचार्ज किया गया तथा आंसू गैस और पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की निगरानी में हुई। उन्होंने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस घटना के लिए अमित शाह से इस्तीफे की मांग की है। संसद में भी अमित शाह ने इस विषय पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्ति के हाथों लोकमान्य तिलक के नाम का पुरस्कार दिया जाना पुणे जैसे सांस्कृतिक और प्रगतिशील शहर का अपमान है, इसलिए कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से उनका विरोध कर रही है।

पश्चिम विभाग की अध्यक्षा दीप्ति चौधरी ने कहा कि छात्रों के मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन करना संविधान द्वारा दिया गया हमारा अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्राओं पर लाठीचार्ज और उनके साथ दुर्व्यवहार जैसी घटनाएं अत्यंत निंदनीय हैं। उन्होंने कहा कि “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” का नारा देने वाली सरकार के निर्देश पर दिल्ली पुलिस ने महिलाओं और छात्राओं पर कार्रवाई की। इसलिए अमित शाह को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।

इस दौरान पुणे शहर जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व विभाग के अध्यक्ष प्रशांत जगताप, पश्चिम विभाग की अध्यक्षा दीप्ति चौधरी, पुणे महानगरपालिका में कांग्रेस के गटनेता रामचंद्र उर्फ चंदू कदम तथा अन्य पदाधिकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

इस आंदोलन में पुणे जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष लहूअण्णा निवंगुणे, नगरसेवक अरविंद शिंदे, अविनाश सालवे, रफीक शेख, साहिल केदारी, विशाल मलके, अश्विनी लांडगे, दीपाली डोख, सुनील शिंदे, गोपाल तिवारी, सुनील मलके, चंद्रशेखर कपोते, अजीत दरेकर, सचिन आडेकर, मेहबूब नदाफ, राजेंद्र शिरसाट, शानी नौशाद, स्वाती शिंदे, अभिजीत गोरे, बालासाहेब अमराळे, उस्मान तांबोळी, चेतन अग्रवाल, लतेंद्र भिंगारे, लता राजगुरु, हनुमंत पवार, सुरेश कांबळे, रमेश सोनकांबळे, विशाल जाधव, शब्बीर खान, सतीश पवार, भरत सुराणा, निलेश बोराटे, संदीप कुदळे, किशोर मारणे, राहुल वंजारी, सुरेश चौधरी, सादिक कुरैशी, दीपक ओव्हाळ, कृष्णा सोनकांबळे, अर्चना शाह, सीमा सावंत, अनीता मकवाणी, संतोष सुपेकर, चेतन पडवळ, आसिफ शेख, प्रिया चेरूकुरी, प्राजक्ता जाधव, मिलिंद पोकळे, आबा जगताप, अनवर शेख, चैतन्य पुरंदरे, गुलाम हुसैन खान, मजहर मणियार, प्रथमेश आबनावे, अकबर शेख, फिरोज शेख, वैभव डांगमाळी, पुष्कर आबनावे, यासीन शेख, दत्ता जाधव, सुरेश मते, अजय खुडे, सुनील पंडित, अविनाश अडसुळ, अवधूत मते, गणेश गुगळे, देविदास लोणकर, दादाश्री कामठे, रामविलास माहेश्वरी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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