पुरुषोत्तम दास एकांत में रहकर रस पीता है: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
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“सादर जय सियाराम”
“एकांत का सेवन नहीं करोगे तो मौन नहीं आएगा”
“एकांतिक सेवन से ही मौन आता”
संसार की बातें , लोगों की भीड़… ये सब मन को भटकाव देती है
एकांत तो साधना की रीढ़ है ।
1-एकांत में प्रभु से मिलन होता है ।
भीड में सब सुनते हैं , एकांत में प्रभु सुनते हैं ।
“एकांत में बैठकर जब ‘सीताराम’ पुकारो तो उत्तर सीधे हृदय में आता है ।
2-एकांत से मन शुद्ध होता है ।
संसार की बातें मन में कचरा भर देती हैं ।
एकांत उस कचरा को साफ करता है ।
3-एकांत में शक्ति संचय होती है ।
बाहर बोलने , देखने , सुनने से ऊपर खर्च होता है ।
एकांत में वही ऊर्जा बचकर नाम जाप , नाम संकीर्तन ध्यान और साधना में लगती है
4-एकांत में आत्मदर्शन होता है ।
संतो का अनुभव:
पूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज- अयोध्या में एकांत में बैठकर कर रामचरितमानस लिखा
मीरा बाई- एकांत में ही कृष्ण से बात करती थीं ।
और पुरुषोत्तम दास-एकांत में ही “सीताराम” का रस पाया ,
पुरुषोत्तम दास एकांत में रहकर रस पीता है ,
प्रतिदिन थोड़ा ही समय सही एकांत और नाम जाप के लिए जरूर निकालें ।
एकांत+ मौन =साधना की सबसे बड़ी ताकत ।
नाम के साथ – खाली एकांत नहीं अपितु” सीताराम सीताराम नाम” के साथ एकांत ।
एकांत डराता नहीं अपितु तारता है ।
शुरुआत में अकेला लगेगा फिर वही एकांत सबसे बड़ा साथी बन जाता है ।
बन जाएगा 🌸
एकांत तात्पर्य प्रभु के साथ एक +अंत ,
जब कोई और न हो तो तब केवल “सीताराम” और हम रह जाते हैं ।
मौन से शक्ति आती है , ज्यादा बोलने से ऊर्जा नष्ट होती है ।
मौन में वही ऊर्जा जाप और साधना में लगती है ।
साधक के लिए 02 विशेष सावधानियां:
1-वाणी की सावधानी-कम बोलों मीठा बोलो , और हो सके तो मौन रहो ।
हर शब्द “सीताराम” में खर्च हो ।
2-संग की सावधानी- व्यर्थ की संगति व्यर्थ की चर्चा से बचो ।
“साधु संग और नाम जाप” यही साधक का जीवन है ।
आज का संकल्प: थोड़ा समय प्रतिदिन एकांत+ मौन+ सीताराम नाम जाप एवं संकीर्तन 🌸
सीताराम सीताराम सीताराम जय सीताराम ।
सीताराम सीताराम सीताराम जय सीताराम ।।
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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