सोनभद्र: विश्व आदिवासी दिवस पर चिल्काटांड में ‘जनजातीय विमर्श 2026’ का भव्य आयोजन

विश्व आदिवासी दिवस पर चिल्काटांड में ‘जनजातीय विमर्श 2026’ का भव्य आयोजन

 

यूपी सोनभद्र

रिपोर्ट अरविन्द

Date 9-8-2026

 

 

धरती आबा बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का हुआ शुभारंभ

 

जनजातीय ज्ञान, संस्कृति, प्रकृति और सतत विकास पर वक्ताओं ने रखे विचार

 

शक्तिनगर/सोनभद्र। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को सोनभद्र जिले के शक्तिनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत चिल्काटांड ग्राम पंचायत सभागार में ‘जनजातीय विमर्श 2026’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “भारतीय ज्ञान परंपरा में जनजातीय ज्ञान : संस्कृति, प्रकृति और सतत विकास” रहा। कार्यक्रम की शुरुआत धरती आबा बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की गई।

कार्यक्रम के संयोजक एवं आयोजन सचिव रंजीत कुमार राय ने उपस्थित गणमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि जनजातीय समाज भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं ज्ञान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जनजातीय समुदायों ने सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए जीवन जीने की ऐसी परंपराएं विकसित की हैं, जिनमें पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक सहयोग और सतत विकास के महत्वपूर्ण सूत्र निहित हैं। उन्होंने कहा कि ‘जनजातीय विमर्श 2026’ का उद्देश्य जनजातीय ज्ञान, संस्कृति और परंपराओं को व्यापक सामाजिक विमर्श से जोड़ना है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ मणिकचंद पांडेय ने कहा कि जनजातीय समाज का पारंपरिक ज्ञान केवल उनकी सांस्कृतिक पहचान नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा की जीवंत धरोहर है। आधुनिक विकास की चुनौतियों के बीच जनजातीय जीवन पद्धति और प्रकृति के प्रति उनकी संवेदनशीलता से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। उन्होंने जनजातीय संस्कृति और लोकज्ञान के संरक्षण के लिए नई पीढ़ी को इससे जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

 

 

 

 

 

 

 

 

मुख्य अतिथि रामप्रकाश पनिका ने कहा कि जनजातीय समाज ने अपनी परंपराओं, लोकसंस्कृति और प्रकृति संरक्षण के माध्यम से भारतीय सभ्यता को समृद्ध किया है। जनजातीय क्षेत्रों के विकास के साथ उनकी सांस्कृतिक पहचान और परंपरागत ज्ञान को संरक्षित रखना भी आवश्यक है।

विशिष्ट अतिथि विश्वजीत सिंह ने कहा कि जनजातीय विमर्श को समाज के व्यापक विकास से जोड़ने की आवश्यकता है। शिक्षा, संस्कृति, खेल और सामाजिक क्षेत्र में जनजातीय युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाने चाहिए।

 

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे ग्राम प्रधान हीरालाल ने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के साथ उसका संबंध हमारी साझा विरासत है। ऐसे आयोजन स्थानीय स्तर पर जनजातीय समाज की प्रतिभाओं और समृद्ध परंपराओं को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

परिचर्चा के दौरान जनजातीय ज्ञान, सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति संरक्षण, पारंपरिक जीवन पद्धति, शिक्षा, युवा प्रतिभा और सतत विकास जैसे विषयों पर सार्थक संवाद हुआ। वक्ताओं ने जनजातीय समाज की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उनकी उपलब्धियों को सम्मान देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में एनसीएल खड़िया क्षेत्र, नंदनी फाउंडेशन, एनटीपीसी अधिकारी डॉ. ओमप्रकाश, समाजसेवी अमरेश पांडेय, राघवेंद्र सिंह, अभय सिंह, विमल त्रिपाठी, राकेश सिंह, पंकज चौबे एवं शशि राज शर्मा सहित अन्य सहयोगियों की विशेष भूमिका रही। आयोजक रंजीत कुमार राय ने सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक सहभागिता से ही ऐसे सामाजिक एवं सांस्कृतिक विमर्श को व्यापक स्वरूप दिया जा सकता है।

 

इस अवसर पर जनजातीय समाज सहित सभी समुदायों के सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विनोद पांडेय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. छोटेलाल ने प्रस्तुत किया। परिचर्चा के समापन पर जनजातीय ज्ञान एवं संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक समरसता, प्रकृति संरक्षण और सतत विकास के लिए सामूहिक प्रयास का संकल्प लिया गया।

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