संत के पास बैठते ही मन शांत हो जाता है: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
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“सादर जय सियाराम”
“गुरुदेव का दर्शन ही महातीर्थ है”
गुरुदेव के चरण कमलों में इस दास साष्टांग दंडवत कोटिश: वंदन ,
संतो की बात ,
“कबीरा दर्शन साधु की , मुख में बसे सुहाग।
दर्श-परस फल बड़ा , लागे नहीं है दाग।।”
संत का दर्शन , संत का स्पर्श= पापों का शमन ,
संत का दर्शन , संत का स्पर्श- उसका फल इतना बड़ा है कि सारे पाप धुल जाते हैं ।
संत दर्शन परम पुनीता ।
तुलसीदास जी कहें ।
मिटे तम सब रीता ।।
संत के पास बैठते ही मन शांत हो जाता है ।
1-गुरुदेव का दर्शन=1000 सत्संग का फल ,
1000 बार सत्संग सुनने से जो समझ में न आए ,
गुरुदेव की एक दृष्टि पड़ते ही सीधे हृदय में उतर जाती है ।
क्योंकि सत्संग में शब्द मिलते है ।
और दर्शन में शक्ति मिलती है ।
2-गुरुदेव का दर्शन=सालों के कृपा के साथ ,
जैसे बादल बरसते हैं तो एक साथ सारी धरती भीग जाती है ।
वैसे ही गुरुदेव जब शिष्य के ऊपर कृपा दृष्टि डालते हैं तो ,
शिष्य के जन्म-जन्मांतर का मैल एक पल में धुल जाता है ।
गुरुदेव का दर्शन परम सौभाग्य प्राप्त होता है ।
उस दर्शन को भी पचाना साधना से , नाम जाप से ही संभव है ।
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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