संत के पास बैठते ही मन शांत हो जाता है: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

संत के पास बैठते ही मन शांत हो जाता है: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

 

🙏🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹

“सादर जय सियाराम”

“गुरुदेव का दर्शन ही महातीर्थ है”

गुरुदेव के चरण कमलों में इस दास साष्टांग दंडवत कोटिश: वंदन ,

संतो की बात ,

“कबीरा दर्शन साधु की , मुख में बसे सुहाग।

दर्श-परस फल बड़ा , लागे नहीं है दाग।।”

संत का दर्शन , संत का स्पर्श= पापों का शमन ,

संत का दर्शन , संत का स्पर्श- उसका फल इतना बड़ा है कि सारे पाप धुल जाते हैं ।

संत दर्शन परम पुनीता ।

तुलसीदास जी कहें ।

मिटे तम सब रीता ।।

संत के पास बैठते ही मन शांत हो जाता है ।

1-गुरुदेव का दर्शन=1000 सत्संग का फल ,

1000 बार सत्संग सुनने से जो समझ में न आए ,

गुरुदेव की एक दृष्टि पड़ते ही सीधे हृदय में उतर जाती है ।

क्योंकि सत्संग में शब्द मिलते है ।

और दर्शन में शक्ति मिलती है ।

2-गुरुदेव का दर्शन=सालों के कृपा के साथ ,

जैसे बादल बरसते हैं तो एक साथ सारी धरती भीग जाती है ।

वैसे ही गुरुदेव जब शिष्य के ऊपर कृपा दृष्टि डालते हैं तो ,

शिष्य के जन्म-जन्मांतर का मैल एक पल में धुल जाता है ।

गुरुदेव का दर्शन परम सौभाग्य प्राप्त होता है ।

उस दर्शन को भी पचाना साधना से , नाम जाप से ही संभव है ।

[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]

🙏🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *