स्मृति जब वृक्ष बन जाए, तो पीढ़ियाँ उसे याद करती हैं
विशेष कलम से — अधिवक्ता राजेश कुमार
नेशनल ब्यूरो चीफ एवं लीगल एडवाइजर, चैनल
जीवन और मृत्यु इस सृष्टि के शाश्वत सत्य हैं। जिसका जन्म हुआ है, उसका जाना भी निश्चित है। कोई भी इस संसार में अमर होकर नहीं आया है। जब भगवान राम को मानव रूप में जन्म लेने के बाद इस धरती से विदा होना पड़ा, जब भगवान श्रीकृष्ण ने भी अपने अवतार-कार्य को पूर्ण कर प्रस्थान किया, तब हम साधारण मनुष्यों का जाना तो प्रकृति का अटल विधान है।
लेकिन किसी अपने का चला जाना केवल एक व्यक्ति का जाना नहीं होता—वह पूरे परिवार के जीवन में एक ऐसा खालीपन छोड़ जाता है, जिसे शब्दों में बांधना कठिन है। विशेषकर एक पिता के लिए जवान पुत्र का असमय बिछुड़ जाना, जीवन की सबसे बड़ी और पीड़ादायक परीक्षा होती है।

बोकारो जिला बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अनिमेष चौधरी जी ने इस असहनीय पीड़ा को केवल आँसुओं तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपने पुत्र की स्मृति को प्रकृति से जोड़कर एक ऐसी मिसाल प्रस्तुत की, जो समाज को भावुक भी करती है और प्रेरणा भी देती है। हर वर्ष अपने पुत्र की पुण्यतिथि पर वे आम के पौधे लोगों एवं अधिवक्ताओं के बीच वितरित करते हैं।

यह केवल पौधों का वितरण नहीं है; यह एक पिता के अथाह प्रेम का जीवंत रूप है। जब वह पौधा बढ़ेगा, छाया देगा और फल देगा, तब हर कोई यह महसूस करेगा कि जैसे एक पिता का प्यार अपने पुत्र की स्मृति को फल-फूल बनाकर समाज को सौंप रहा है।
“फूलों की माला तो कुछ दिन में मुरझा जाती है,
पर प्रेम से लगाया गया वृक्ष वर्षों तक मुस्कुराता है।
जिसे हम दिल में बसाकर प्रकृति से जोड़ दें,
उसकी याद हर मौसम में फिर से लौट आती है।”

आज बोकारो न्याय सदन परिसर में माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अनिल कुमार मिश्रा जी के नेतृत्व में इस पुण्य अवसर पर आम के पौधों का
