Etawah News: चंबल की धरती पर सिनेमा का वैश्विक संगम, एक दर्जन से अधिक देशों की फिल्मों ने जीता दिल
दो दिवसीय 17वें चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का भव्य आयोजन संपन्न, अंतरराष्ट्रीय और भारतीय श्रेणियों में फिल्मों को मिले पुरस्कार
रिपोर्ट एम एस वर्मा मनोज कुमार TTN 24 NEWS
इटावा। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) का नवीन सभागार शनिवार और रविवार को सिनेमा के वैश्विक रंगों का गवाह बना। चंबल अंचल के सबसे पुराने अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में शामिल 17वें चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का दो दिवसीय आयोजन संपन्न हो गया। इस दौरान भारत, कनाडा, ग्रीस, मैक्सिको, पाकिस्तान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, सीरियाई अरब गणराज्य, ताइवान, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम सहित एक दर्जन से अधिक देशों की चयनित 30 से अधिक फिल्मों की स्क्रीनिंग की गई। समारोह का आयोजन चंबल संग्रहालय, पंचनद और ईऑन फिल्म्स की संयुक्त पहल पर किया गया।
फिल्म समारोह में अलग-अलग देशों की संस्कृति, सामाजिक परिस्थितियों, मानवीय संवेदनाओं और रचनात्मक अभिव्यक्तियों को पर्दे पर देखने का अवसर मिला। अंतरराष्ट्रीय और भारतीय फिल्मों की विविधता ने दर्शकों को प्रभावित किया। समारोह में फीचर फिल्मों, डॉक्यूमेंट्री, लघु फिल्मों, एनिमेशन, वेब सीरीज और संगीत वीडियो की स्क्रीनिंग के साथ विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट फिल्मों और फिल्मकारों को सम्मानित किया गया।
ज्यूरी सदस्यों द्वारा इस वर्ष चयनित अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में कनाडा की चर्चित फीचर फिल्म ‘कैन आई हैव दिस डांस?’ और स्विट्जरलैंड-भारत की संयुक्त डॉक्यूमेंट्री ‘बर्नार्ड एंड रश्मा: अ स्विस-इंडियन स्टोरी’ ने दर्शकों को खूब प्रभावित किया। एनिमेशन वर्ग में ‘मिस यू इन डांसिंग क्रॉस-स्टिच’ और ‘एनिमी हीरोज’ की दृश्यात्मक कहानी कहने की शैली की सराहना हुई।

लघु फिल्म वर्ग में ‘अ कप ऑफ टी’, ‘रोहिड़ा’, ‘द फर्स्ट टोन’, ‘ट्रस्ट द वार्मेस्ट फॉर्म ऑफ कैपिटल’ और ‘द लास्ट मिनट्स’ जैसी फिल्मों ने मानवीय संवेदनाओं, पूंजी और रिश्तों के बदलते स्वरूप पर गहरी टिप्पणी की। वहीं, वेब सीरीज सेक्शन में ‘द नॉर्मल एमएफर’ को युवा दर्शकों ने विशेष रूप से पसंद किया।
भारतीय प्रतिस्पर्धा वर्ग में तमिल फीचर फिल्म ‘अरुलवान’, मराठी पृष्ठभूमि पर बनी ‘धराऊ’ और हिंदी फीचर फिल्में ‘आदिशेष’ व ‘अद्विक’ प्रदर्शित की गईं। एनिमेशन श्रेणी में ‘करेजस बर्ड’ ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। भारतीय फिल्मों की स्क्रीनिंग के दौरान सामाजिक सरोकारों, पारिवारिक रिश्तों, संवेदनाओं और समकालीन विषयों पर आधारित कहानियों को देखने का अवसर मिला।
लघु फिल्म वर्ग इस बार सबसे समृद्ध श्रेणियों में शामिल रहा। इसमें ‘टचिंग कॉन्शसनेस ऑफ शिवा’, ‘सितारा’, ‘1930’, ‘हिज्र’, ‘रैगपिकर्स लिस्ट’, ‘व्हाट रिमेन्स ऑफ अस’, ‘रेड- द कलर ऑफ साइलेंस’, ‘किशन’स स्ट्रिंग्स’ और सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करने वाली ‘आखिर ऐसा क्यों होता है?’ जैसी फिल्में शामिल रहीं। देशभक्ति पर आधारित संगीत वीडियो ‘पहला तिरंगा (फर्स्ट ट्राइकलर)’ के प्रदर्शन के दौरान पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। तेलुगु संगीत वीडियो ‘नी कोसम’ ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया।
चंबल की विरासत से रूबरू हुई युवा पीढ़ी
फेस्टिवल का एक प्रमुख आकर्षण डायट परिसर में लगाई गई चंबल संग्रहालय, पंचनद की विशेष प्रदर्शनी रही। इसमें चंबल अंचल से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज, सैकड़ों तस्वीरें, स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित पांडुलिपियां, पुरानी पत्र-पत्रिकाएं और पुस्तकें प्रदर्शित की गईं। प्रदर्शनी ने दर्शकों को चंबल के इतिहास, संस्कृति और विरासत को करीब से जानने का अवसर दिया।

प्रदर्शनी देखने वाले युवाओं ने कहा कि चंबल और बीहड़ की प्रचलित छवि से अलग इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जानना उनके लिए रोमांचक अनुभव रहा। चंबल संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. शाह आलम राना द्वारा चंबल अंचल में दो दशकों से अधिक समय से किए जा रहे प्रयास क्षेत्र के इतिहास, संस्कृति और सामाजिक जीवन से जुड़ी जानकारियों को देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के 17वें संस्करण का समापन शानदार और गौरवपूर्ण रहा। यह आयोजन सिनेमा, सृजनात्मकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को समर्पित यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। समारोह ने स्थानीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीय सिनेमा की विविधता को सामने रखने के साथ चंबल क्षेत्र को सांस्कृतिक गतिविधियों और रचनात्मक संवाद के मंच के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी अपनी भूमिका निभाई।
सिनेमा के माध्यम से संस्कृतियों को जोड़ने का संकल्प
फिल्म समारोह समिति के अध्यक्ष प्रो. डॉ. मोहन दास ने कहा कि 17वां संस्करण केवल सफलता का उत्सव नहीं, बल्कि सिनेमा की दुनिया से किया गया एक नया वादा है। यह नई कहानियों की खोज, प्रतिभाओं को प्रोत्साहन, विविधता के सम्मान और सिनेमा के माध्यम से संस्कृतियों के बीच सेतु निर्माण का वादा है। उन्होंने कहा कि सिनेमा की शक्ति, कहानी कहने की कला और चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल की गौरवशाली यात्रा में अनेक नए अध्याय जुड़ रहे हैं।
उन्होंने देश-विदेश के फिल्मकारों, कलाकारों, सिनेमा प्रेमियों और दर्शकों से मिले स्नेह, उत्साह और सहयोग के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उनके अनुसार, सभी की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने इस संस्करण को कहानी कहने की कला, विविधता और सिनेमाई उत्कृष्टता का अविस्मरणीय उत्सव बना दिया।
प्रो. डॉ. मोहन दास ने कहा कि इस फेस्टिवल ने एक बार फिर सिद्ध किया है कि सिनेमा सीमाओं से परे जाकर संस्कृतियों को जोड़ने, विचारों को प्रेरित करने और विविध आवाजों को मंच प्रदान करने की अद्भुत शक्ति रखता है। यह सफलता आयोजन टीम के समर्पण, सहयोगियों के समर्थन और प्रतिभागियों के विश्वास का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि का उत्सव मनाते हुए आयोजक नए संकल्प और दूरदृष्टि के साथ चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
फिल्मकारों ने आयोजन को बताया यादगार
फिल्मकार सागर बनिक ने कहा कि फिल्म फेस्टिवल का हिस्सा बनना उनके लिए बेहद सुखद अनुभव रहा। फेस्टिवल के चेयरमैन प्रो. डॉ. मोहन दास के स्नेहपूर्ण आमंत्रण पर वह एक दर्शक के रूप में यहां पहुंचे और सिनेमा के इस खूबसूरत उत्सव को देखकर अभिभूत हो गए। फिल्मों की रचनात्मकता, प्रेरणादायक कहानियों और सिनेमा के प्रति लोगों के जुनून ने इस अनुभव को यादगार बना दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी शानदार पहल का हिस्सा बनकर उन्हें दिल से खुशी हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के 17वें संस्करण में उनकी फिल्म ‘रेड’ का चयन और प्रदर्शन होना उनके लिए खुशी और गर्व की बात है।
फिल्ममेकर संजय मैथ्यू ने कहा कि यह फिल्म फेस्टिवल कला, रचनात्मक अभिव्यक्ति और कहानी कहने के जादू का खूबसूरत उत्सव है। इस आयोजन में शामिल हुए अपने मित्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह समारोह सिनेमा की उस अद्भुत शक्ति को दर्शाता है, जो भावनाओं को जीवंत करती है, विभिन्न दृष्टिकोणों को सामने लाती है और सार्थक कहानियों के माध्यम से लोगों को जोड़ती है।
उन्होंने कहा कि शूटिंग में व्यस्त होने के कारण वह स्वयं आयोजन में शामिल नहीं हो सके। इसके बावजूद अपनी फिल्म ‘रेड’ को इस प्रतिष्ठित आयोजन का हिस्सा बनते देखना उनके लिए बेहद खास अनुभव है।
चंबल वैश्विक सिनेमा पर्यटन के साथ कर रहा कदमताल
समारोह का संचालन करते हुए चंबल म्यूजियम के संरक्षक डॉ. कमल कुशवाहा ने कहा कि चंबल वैश्विक सिनेमा पर्यटन के साथ कदमताल कर रहा है। उन्होंने चंबल क्षेत्र के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इतिहास के उत्खनन और संरक्षण के साथ चंबल संग्रहालय पांच नदियों के अनोखे महासंगम पंचनद के माध्यम से विश्व पर्यटन की खिड़की खोल रहा है।
इस अवसर पर लोकगायक सुनील पंडित ने स्थानीय भाषा में गीत प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। उनके गीतों ने समारोह में स्थानीय संस्कृति और लोक परंपराओं का रंग भर दिया। अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के प्रदर्शन के बीच स्थानीय भाषा और लोकसंगीत की प्रस्तुतियों ने चंबल की सांस्कृतिक पहचान को भी प्रमुखता से सामने रखा।
अंतरराष्ट्रीय श्रेणी में इन फिल्मों ने जीते पुरस्कार
अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म एवं डॉक्यूमेंट्री श्रेणी में ‘कैन आई हैव दिस डांस?’ को सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म और ‘बर्नार्ड एंड रश्मा: अ स्विस-इंडियन स्टोरी’ को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री का पुरस्कार दिया गया।
एनिमेशन फिल्म श्रेणी में ‘मिस यू इन डांसिंग क्रॉस-स्टिच’ को सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फिल्म और ‘एनिमी हीरोज’ को द्वितीय सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फिल्म चुना गया।
लघु फिल्म श्रेणी में ‘रोहिड़ा’ को सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म, ‘अ कप ऑफ टी’ को द्वितीय सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म और ‘ट्रस्ट द वार्मेस्ट फॉर्म ऑफ कैपिटल’ को सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म-ज्यूरी पुरस्कार प्रदान किया गया।
निर्देशन श्रेणी में ‘रोहिड़ा’ को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, ‘एनिमी हीरोज’ को द्वितीय सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और ‘द लास्ट मिनट्स’ को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक-ज्यूरी पुरस्कार मिला।
महिला निर्देशक श्रेणी में ‘द फर्स्ट टोन’ को सर्वश्रेष्ठ महिला निर्देशक और ‘अ कप ऑफ टी’ को द्वितीय सर्वश्रेष्ठ महिला निर्देशक का पुरस्कार दिया गया।
संगीत वीडियो श्रेणी में ‘नी कोसम’ को सर्वश्रेष्ठ संगीत वीडियो चुना गया। वेब सीरीज श्रेणी में ‘द नॉर्मल एमएफर’ को सर्वश्रेष्ठ वेब सीरीज का पुरस्कार मिला।
भारतीय श्रेणी में भी फिल्मों और कलाकारों का सम्मान
भारतीय फीचर फिल्म श्रेणी में ‘अरुलवान’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म, ‘धराऊ’ को द्वितीय सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म और ‘छबी’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म-ज्यूरी पुरस्कार दिया गया। ‘आदिशेष’ को सर्वश्रेष्ठ क्षेत्रीय फिल्म चुना गया।
अभिनय श्रेणी में ‘आदिशेष’ के लिए अरुण नलावड़े को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, ‘अरुलवान’ के लिए कृतिका को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री, ‘धराऊ’ के लिए शौर्य वंजाले को सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार और ‘छबी’ के लिए ध्रुव छेड़ा को सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेता का पुरस्कार मिला।
लघु फिल्म एवं एनिमेशन श्रेणी में ‘करेजस बर्ड’ को सर्वश्रेष्ठ एनिमेशन फिल्म, ‘रेड- द कलर ऑफ साइलेंस’ को सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म और ‘व्हाट रिमेन्स ऑफ अस’ को द्वितीय सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म चुना गया। ‘सितारा’ को सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म-ज्यूरी पुरस्कार, ‘आखिर ऐसा क्यों होता है?’ को सर्वश्रेष्ठ लघु फिल्म-राज्य पुरस्कार और ‘किशन’स स्ट्रिंग्स’ को सर्वश्रेष्ठ क्षेत्रीय लघु फिल्म का पुरस्कार दिया गया।
निर्देशन श्रेणी में ‘रेड- द कलर ऑफ साइलेंस’ के लिए संजय मैथ्यू को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक, ‘हिज्र’ के लिए लविश जिंदल को द्वितीय सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और ‘टचिंग कॉन्शसनेस ऑफ शिवा’ के लिए विनोदकुमार कौठाल को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक-ज्यूरी पुरस्कार प्रदान किया गया।
कहानी लेखन श्रेणी में ‘1930’ के लिए मोहिंदर प्रताप सिंह और अपर्णा पासलकर को सर्वश्रेष्ठ कहानी, ‘रैगपिकर्स लिस्ट’ के लिए चंद्रवीर सिंह को द्वितीय सर्वश्रेष्ठ कहानी और ‘व्हाट रिमेन्स ऑफ अस’ के लिए प्रत्यय साहा को सर्वश्रेष्ठ कहानी-ज्यूरी पुरस्कार मिला।
संगीत वीडियो श्रेणी में ‘पहला तिरंगा (फर्स्ट ट्राइकलर)’ को सर्वश्रेष्ठ संगीत वीडियो का पुरस्कार दिया गया।
इस तरह 17वें चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ने अंतरराष्ट्रीय और भारतीय सिनेमा की विविधता को एक मंच पर प्रस्तुत करते हुए फिल्मों, फिल्मकारों, कलाकारों और दर्शकों को आपस में जोड़ने का काम किया। चंबल की ऐतिहासिक विरासत, स्थानीय लोकसंस्कृति और वैश्विक सिनेमा के मेल ने इस आयोजन को खास पहचान दी।
