Etawah News: महावीर निर्वाणोत्सव पर जैन समाज की अनूठी पहल, बच्चों को दिलाया जाएगा पटाखे नहीं चलाने का संकल्प

Etawah News: महावीर निर्वाणोत्सव पर जैन समाज की अनूठी पहल, बच्चों को दिलाया जाएगा पटाखे नहीं चलाने का संकल्प*

 

*अहिंसा संकल्प पत्र के माध्यम से बच्चों में जगाई जाएगी जीवदया की भावना, 500 से अधिक पुरस्कारों से किया जाएगा सम्मानित*

 

रिपोर्ट एम एस वर्मा मनोज कुमार TTN 24 NEWS

जसवंतनगर। भगवान महावीर स्वामी के निर्वाणोत्सव के पावन अवसर पर अहिंसा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने और उसे व्यवहार में उतारने के उद्देश्य से नगर की जैन समाज ने एक अनूठी पहल की है। मुनि श्री 108 भावसागर महाराज के निर्देशन में दीपावली पर पटाखे और आतिशबाजी नहीं चलाने के लिए बच्चों से अहिंसा संकल्प कराया जा रहा है।इस अभियान के तहत अहिंसा संकल्प पत्र तैयार किए गए हैं, जिन्हें नगर के जैन समाज के बच्चों एवं अन्य परिवारों को वितरित किया गया। संकल्प पत्र के माध्यम से बच्चों को जैन धर्म के मूल सिद्धांत अहिंसा, जीवदया तथा प्रत्येक जीव में भगवान स्वरूप आत्मा के दर्शन करने की भावना से परिचित कराया जा रहा है।

पहल का उद्देश्य है कि भगवान महावीर के निर्वाण कल्याणक के अवसर पर दीपावली को केवल उत्सव के रूप में ही नहीं, बल्कि अहिंसा और करुणा के संदेश के साथ मनाया जाए। बच्चों से संकल्प कराया जा रहा है कि वे दीपावली पर पटाखे, फुलझड़ियां, अनार एवं अन्य आतिशबाजी का प्रयोग नहीं करेंगे, क्योंकि इनसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से असंख्य जीवों की हिंसा होती है।

 

मुनि श्री ने अहिंसा के सिद्धांत को केवल धार्मिक उपदेशों तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन में अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैन समाज का मूल आधार अहिंसा है। इसका वास्तविक पालन तभी सार्थक होगा, जब हम अपने व्यवहार में भी इसे उतारेंगे। विवाह समारोहों एवं अन्य मांगलिक आयोजनों में होने वाली आतिशबाजी का भी निषेध करना चाहिए।अभियान के अंतर्गत 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक संकल्प पत्र भरकर जमा किए जाएंगे। पांच से 18 वर्ष तक की आयु के जो बच्चे इस वर्ष अथवा भविष्य में किसी भी वर्ष पटाखे नहीं चलाने का संकल्प लेकर प्रपत्र भरेंगे, उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा। ऐसे बच्चों को पुरस्कार स्वरूप चांदी के सिक्के सहित 500 से अधिक उपहार एवं स्मृति चिह्न प्रदान किए जाएंगे।जैन समाज की इस पहल का उद्देश्य बच्चों के मन में बचपन से ही अहिंसा, करुणा और जीवों के प्रति संवेदनशीलता के संस्कार विकसित करना है, ताकि भगवान महावीर का संदेश केवल प्रवचनों तक सीमित न रहकर समाज के आचरण में भी दिखाई दे।

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