रोज सुबह उठकर अपने पूज्य गुरुदेव भगवान का ध्यान करना: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
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“सादर जय सियाराम”
अपने पूज्य गुरुदेव भगवान कि महिमा का गान करना ही शिष्य का सबसे बड़ा धर्म है ।
1-जो शिष्य अपने पूज्य गुरुदेव भगवान के महिमा का वर्णन नहीं करता गुणगान नहीं करता उस शिष्य कि संपदा और यश दोनों नष्ट हो जाता है
क्योंकि गुरुदेव की कृपा से ही सब बढ़ता है ।
गुरुदेव का अभिमान : “मेरे गुरुदेव सबसे श्रेष्ठ है”
ये अभिमान भी मुक्ति का कारण बन जाता है ।
ये अभिमान अहंकार नहीं , प्रेम और समर्पण है ।
गुरु गोविन्द से भी बड़े हैं ।
क्योंकि गुरु ही गोविंद तक पहुंचाता है ।
रोज सुबह उठकर अपने पूज्य गुरुदेव भगवान का ध्यान करना और गुरुदेव के उपदेशों पर चलना यही गुरुदेव की सच्ची सेवा है ।
गुरु हु सब कुछ हैं , गुरुदेव की कृपा से ही नाम मिलता है ।
सेवा का भाव मिलता है ।
और गुरुदेव से प्रसन्नता मिलती है ।
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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