Etawah News: मुनि श्री 108 भाव सागर महाराज के प्रवचन में जीवन मूल्यों पर विशेष प्रकाश
रिपोर्ट एम एस वर्मा मनोज कुमार TTN 24 NEWS
जसवंतनगर/इटावा: जसवंतनगर में चल रहे अमृतमय चातुर्मास के अंतर्गत गुरुवार को मुनि श्री 108 भाव सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचनों में जीवन, संस्कृति एवं आत्मकल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला।उन्होंने कहा कि मनुष्य को संसार में रहते हुए अप्रभावित होकर देखना और देखकर भी अप्रभावित रहना सीखना चाहिए। यही समता और आत्मिक विकास का मार्ग है।
*मुनिश्री ने कहा कि जगत में अधिकांश विवाद और संघर्ष जड़, जोरू और जमीन को लेकर होते हैं। इतिहास और महाकाव्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि महाभारत और रामायण जैसे युद्धों के पीछे भी पारिवारिक एवं सामाजिक कारण प्रमुख रहे हैं।*
उन्होंने वर्तमान समय में प्रसारित होने वाले अनेक टीवी सीरियलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पाश्चात्य प्रभाव और भ्रामक प्रस्तुतियों के कारण भारतीय संस्कृति और संस्कारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। समाज को अपनी सांस्कृतिक विरासत और मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए।मुनि श्री ने कहा कि इस संसार में सामान्य बने रहना सबसे कठिन कार्य है, क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को विशेष बनाना चाहता है, जबकि वस्तु का स्वभाव सामान्य रहना ही है। सादगी और सहजता ही जीवन की वास्तविक सुंदरता है।*
*ब्रह्मचर्य की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि आत्मा में रमण करना ही वास्तविक ब्रह्मचर्य है। जब मनुष्य बाहरी विषयों से हटकर आत्मचिंतन करता है, तभी उसका जीवन पवित्र और संयमित बनता है।*
*प्रवचन के अंत में मुनिश्री ने जीवन की तुलना आइसक्रीम से करते हुए कहा कि जीवन एक आइसक्रीम की तरह है, इसे नियम और संयम के साथ जी लो, क्योंकि यह निरंतर पिघल रहा है। इसलिए समय का सदुपयोग कर धर्म, संयम और आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।*
