जीवन में गुरु आने के बाद जीवन को एक नई दिशा, एक लक्ष्य मिल जाती है: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

जीवन में गुरु आने के बाद जीवन को एक नई दिशा, एक लक्ष्य मिल जाती है: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

 

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“सादर जय सियाराम”

“जब तक जीव के जीवन में गुरु का पदार्पण नहीं हो जाता तब तक जीव का जीवन अधूरा ही रहता है ।

बिना गुरु के हम लाख किताबें पढ़ लें , डिग्री ले लें ।

पर मैं कौन हूं , क्यों आया हूं , कहां जाना है”

ये 3 बात अनुत्तरित रहते हैं ।

गुरु ज्ञान का दीपक जलाते हैं ।

“तमसो मा ज्योतिर्गमय”

2 .तब तक भटकाव बना रहता है ।

मन 10 दिशाओं में भागता रहता है ।

आज ये काम , कल वो काम ।

ऊर्जा बिखर जाती है ।

जीवन में गुरु आने के बाद जीवन को एक नई दिशा , एक लक्ष्य मिल जाता है ।

3.तब तक मोह-माया का बंधन नहीं टूटता संसार में उलझे रहते हैं ।

मान-अपमान लाभ-हानि में ।

गुरु विवेक देते हैं ।

“ये सब नश्वर है”

वैराग्य एवं भक्ति का मार्ग प्रशस्त करते हैं ।

“गुरु का पदार्पण=जीवन का उद्धार”

गुरु के बिना सब पढ़-लिखकर भी अज्ञान ।

जब जीवन में गुरु का पदार्पण हो जाता है ।

बिना गुरु के जीव ऐसे है जैसे बिना पतवार की नाव ।

लहरें जिधर ले जाएं उधर ।

तब अधंकार मिट जाता है ।

दिशा मिल जाती है ।

और जीवन सार्थक हो जाता है ।

[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]

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