जीवन में गुरु आने के बाद जीवन को एक नई दिशा, एक लक्ष्य मिल जाती है: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
🙏🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹
“सादर जय सियाराम”
“जब तक जीव के जीवन में गुरु का पदार्पण नहीं हो जाता तब तक जीव का जीवन अधूरा ही रहता है ।
बिना गुरु के हम लाख किताबें पढ़ लें , डिग्री ले लें ।
पर मैं कौन हूं , क्यों आया हूं , कहां जाना है”
ये 3 बात अनुत्तरित रहते हैं ।
गुरु ज्ञान का दीपक जलाते हैं ।
“तमसो मा ज्योतिर्गमय”
2 .तब तक भटकाव बना रहता है ।
मन 10 दिशाओं में भागता रहता है ।
आज ये काम , कल वो काम ।
ऊर्जा बिखर जाती है ।
जीवन में गुरु आने के बाद जीवन को एक नई दिशा , एक लक्ष्य मिल जाता है ।
3.तब तक मोह-माया का बंधन नहीं टूटता संसार में उलझे रहते हैं ।
मान-अपमान लाभ-हानि में ।
गुरु विवेक देते हैं ।
“ये सब नश्वर है”
वैराग्य एवं भक्ति का मार्ग प्रशस्त करते हैं ।
“गुरु का पदार्पण=जीवन का उद्धार”
गुरु के बिना सब पढ़-लिखकर भी अज्ञान ।
जब जीवन में गुरु का पदार्पण हो जाता है ।
बिना गुरु के जीव ऐसे है जैसे बिना पतवार की नाव ।
लहरें जिधर ले जाएं उधर ।
तब अधंकार मिट जाता है ।
दिशा मिल जाती है ।
और जीवन सार्थक हो जाता है ।
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
🙏🙏🌹🌹🙏🙏🌹🙏
