Etawah News: तिरंगा नहीं राष्ट्रध्वज कहें, अशोक चक्र का महत्व भी समझें : प्रेम कुमार शाक्य
रिपोर्ट एम एस वर्मा मनोज कुमार TTN 24 NEWS
इटावा। राष्ट्रध्वज देश की आन बान और शान का प्रतीक है। विभिन्न आयोजनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में राष्ट्रध्वज के लिए प्रचलित हो रहे तिरंगा शब्द के स्थान पर अधिक गरिमापूर्ण राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय ध्वज शब्द का प्रयोग किए जाने की समाजसेवी प्रेम कुमार शाक्य ने अपील की है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रध्वज केवल तीन रंगों का ध्वज नहीं बल्कि भारत की एकता अखंडता संप्रभुता स्वतंत्रता और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। इसके मध्य में अंकित अशोक चक्र भी राष्ट्रध्वज का महत्वपूर्ण हिस्सा है जो धर्म गति प्रगति और निरंतर आगे बढ़ते रहने की भावना का प्रतीक है। ऐसे राष्ट्रीय प्रतीक का उल्लेख करते समय शब्दों में भी उसकी गरिमा और सम्मान झलकना चाहिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक आयोजनों में राष्ट्रध्वज का उल्लेख राष्ट्रध्वज या राष्ट्रीय ध्वज के रूप में किए जाने की परंपरा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इससे नई पीढ़ी में राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान और उनके महत्व को समझने की भावना मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि हमारा राष्ट्रध्वज केवल तीन रंगों की पहचान नहीं बल्कि देश के गौरव राष्ट्रीय मूल्यों और करोड़ों भारतीयों की भावनाओं का प्रतीक है। इसमें शामिल अशोक चक्र हमें निरंतर आगे बढ़ने और अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है। इसलिए इसके नाम में सम्मान और गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
श्री शाक्य ने सभी सामाजिक संगठनों शिक्षण संस्थानों कार्यक्रम आयोजकों और नागरिकों से अपील की कि राष्ट्रध्वज की गरिमा मर्यादा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दें तथा औपचारिक अवसरों पर राष्ट्रध्वज शब्द के प्रयोग को प्रोत्साहित करें।
