विनोद कुमार पांडे ब्यूरो चीफ
कवरेज के दौरान पत्रकार के साथ बदसलूकी, धमकी या मारपीट पर कानूनी कार्रवाई का अधिकार
1 जुलाई 2024 से BNS लागू, पत्रकारों को भी अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी जरूरी
सरगुजा संभाग। पत्रकार जनहित से जुड़े मामलों को समाज और प्रशासन के सामने लाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। समाचार संकलन के दौरान यदि किसी पत्रकार के साथ जबरन रोकने, धमकी देने, मारपीट करने, अवैध रूप से रोककर रखने या उसके कैमरा, मोबाइल अथवा अन्य पत्रकारिता उपकरण को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने जैसी घटना होती है, तो घटना की प्रकृति और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
1 जुलाई 2024 से देश में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) लागू है। यह पत्रकारों के लिए अलग से बनाया गया कानून नहीं है, बल्कि देश का सामान्य आपराधिक कानून है। इसलिए पत्रकार के साथ किसी आपराधिक कृत्य की स्थिति में भी घटना के तथ्यों के अनुसार BNS की संबंधित धाराएं लागू हो सकती हैं।
कवरेज के दौरान जबरन रोकने पर
यदि किसी पत्रकार को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी दिशा में जाने से जबरन रोका जाता है, तो घटना के तथ्यों के अनुसार BNS की धारा 126 (सदोष अवरोध) का प्रावधान लागू हो सकता है।
यदि किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी स्थान पर रोककर रखा जाता है, तो परिस्थितियों के अनुसार BNS की धारा 127 (सदोष परिरोध) से संबंधित कार्रवाई हो सकती है।
धमकी या मारपीट की स्थिति में
कवरेज के दौरान पत्रकार को डराने या गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देने की स्थिति में घटना के अनुसार BNS की धारा 351 (आपराधिक धमकी) लागू हो सकती है।
यदि पत्रकार के साथ मारपीट कर चोट पहुंचाई जाती है, तो चोट की प्रकृति और घटना के तथ्यों के आधार पर BNS की संबंधित धाराओं में कार्रवाई हो सकती है। गंभीर चोट होने पर गंभीर चोट से संबंधित प्रावधान भी लागू हो सकते हैं।
कैमरा या उपकरण को नुकसान पहुंचाने पर
पत्रकार के कैमरा, मोबाइल, माइक या अन्य उपकरण को जानबूझकर नुकसान पहुंचाने की स्थिति में नुकसान और परिस्थितियों के आधार पर BNS की धारा 324 (रिष्टि) सहित संबंधित कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं।
पत्रकार को क्या करना चाहिए?
कवरेज के दौरान किसी प्रकार की घटना होने पर पत्रकार को घबराने के बजाय उपलब्ध साक्ष्यों को सुरक्षित रखना चाहिए। घटना से संबंधित फोटो, वीडियो, ऑडियो, कॉल रिकॉर्ड, मैसेज और प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी सुरक्षित रखना शिकायत और जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है।
पुलिस को दी जाने वाली शिकायत में पत्रकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह किस घटना की कवरेज कर रहा था, घटना कब और कहां हुई, किस व्यक्ति ने क्या किया, उसे किस प्रकार रोका या धमकाया गया और उसके साथ मारपीट अथवा उपकरण को नुकसान हुआ या नहीं।
एक जरूरी कानूनी सावधानी
किसी पत्रकार को परेशान करने या कवरेज में विवाद होने की हर घटना में एक जैसी धाराएं लागू नहीं होतीं। कौन-सी धारा लगेगी, यह घटना के वास्तविक तथ्यों, साक्ष्यों और जांच के आधार पर तय होता है।
इसलिए पत्रकारों को अपने अधिकारों की जानकारी रखने के साथ-साथ कानून की धाराओं का सही उपयोग भी करना चाहिए। गलत धारा का दावा करने के बजाय घटना के वास्तविक तथ्य पुलिस के सामने रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
पत्रकारिता जनहित की आवाज है। कवरेज के दौरान किसी पत्रकार के साथ धमकी, मारपीट, जबरन रोकने या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी आपराधिक घटना होती है, तो पत्रकार को कानून के अनुसार शिकायत और कार्रवाई का अधिकार है।
