सावन का महीना , झूमते हुए बादल , रिमझिम फुहार , और अपने अवध में प्रभु श्रीसीताराम जी का दिव्य झूला महोत्सव: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
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“सादर जय सियाराम”
सबसे पहले आप सभी भक्तगण एवं शिष्यगण को इस सावन के झूला महोत्सव पर आप सभी भक्तगण एवं शिष्यगण को सहृदय बधाई ।
“झूला महोत्सव स्वयं में एक दिव्य प्रेम और समर्पण का उत्सव है ।”
आज इस झूला महोत्सव के पावन अवसर पर ,
इस दास को-आप सभी
संत-भक्तों के बीच , प्रभु को एक पद सुनाने का सौभाग्य प्राप्त , एक सुवसर प्राप्त हुआ
यह हमारी योग्यता नहीं , यह तो पूज्य गुरुदेव भगवान की महती कृपा करुणा और आप सभी के इस प्रेम का फल है ।
सावन का महीना , झूमते हुए बादल , रिमझिम फुहार , और अपने अवध में प्रभु श्रीसीताराम जी का दिव्य झूला महोत्सव !
जैसे मां अपने बालक को झूला झूलती है ,
वैसे ही आज सभी भक्तगण सब मिलकर अपने प्रभु श्रीसीताराम जी को झूला झूला रहा है ।
जब भक्त झूलाता है , तो भगवान भक्त के प्रेम में झूलते हैं ।
झूला उत्सव प्रेम का उत्सव है हम प्रभु को झूलाते नहीं है । अपितु प्रभु हमारे प्रेम में झूलते हैं ।
झूला महोत्सव इसका अर्थ यह नहीं है कि यह केवल एक त्योहार या परंपरा आयोजन मात्र नहीं है ।
सावन में जब प्रकृति झूमती है , तब भक्त का हृदय भी अपने प्रभु के प्रेम में झूमने लगता है ।
झूला झुलाना , प्रेम को व्यक्त करने का सबसे सबसे सरल और मधुर माध्यम है ।
झूला महोत्सव स्वयं में एक ऐसा उत्सव है ।
जहां भक्त भगवान को नहीं , अपितु भगवान भक्त के प्रेम में झूलते हैं ।
यह सबसे उच्च आध्यात्मिक भाव है ।
अंत में मैं सभी भक्तगण एवं शिष्यगण और आयोजन समिति को हृदय साधुवाद देता हूं , जिनके सहयोग से यह दिव्य उत्सव संपन्न हो रहा है ।
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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