अभ्यास और वैराग्य से ही सब प्राप्त होता है:आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

अभ्यास और वैराग्य से ही सब प्राप्त होता है:आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

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“सादर जय सियाराम”

शनै: पन्था: शनै: कन्था शनै: पर्वतमस्तके ।

शनैर्विद्या शनैर्वित्तं पञ्चैतानि शनै: शनै: ।।

“मार्ग धीरे-धीरे तय किया जाता है ।

कन्था (वस्त्र\कंबल) धीरे-धीरे तैयार किया जाता है ।

और पर्वत के शिखर तक धीरे-धीरे पहुंचा जाता है ।

विद्या और धन धीरे-धीरे ही प्राप्त होता है ।

ये पांच चीजें धीरे-धीरे ही प्राप्त होती है ।”

1-मार्ग- भक्ति का, साधना का , जीवन का रास्ता एक दिन में नहीं चलता ।

अपितु रोज-रोज एक कदम ।

2-कन्धा/वस्त्र – चरित्र , संस्कार , संयम ये सब रोज की मेहनत से बनती है ।

3-पर्वत शिखर- लक्ष्य , गुरु कृपा , आत्मज्ञान – सब्र और पुरुषार्थ से मिलता है ।

4-धन – सच्चा धन =संतोष , भक्ति , और सदाचार ।

ये भी धीरे-धीरे संचित होता है ।

सार : जल्दीबाजी में सिद्धि नहीं मिलती है ।

जैसे पेड़ धीरे-धीरे बढ़कर फल देता है ।

वैसे ही साधक भी धीरे-धीरे सिद्ध होता है ।

गीता में भगवान कहते हैं –

“अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृहृते”

अभ्यास और वैराग्य से ही सब प्राप्त होता है ।

[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]

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