Etawah News: थाना अध्यक्ष कमल भाटी की सूझबूझ से खुली लूट की झूठी कहानी, एक हजार रुपये बचाने के लिए नाबालिग ने रचा षड्यंत्र
सीसीटीवी फुटेज और दोस्त से पूछताछ में सामने आया सच, पुलिस ने समझाइश देकर नाबालिग को परिजनों के सुपुर्द किया
रिपोर्ट एम एस वर्मा मनोज कुमार TTN 24 NEWS
जसवंतनगर/इटावा: दोस्त से लिए गए उधार के एक हजार रुपये लौटाने के दबाव से बचने के लिए एक नाबालिग ने 10 हजार रुपये और मोबाइल फोन लूटे जाने की झूठी कहानी गढ़ दी। नाबालिग द्वारा पुलिस को दी गई लूट की सूचना के बाद मामला गंभीर मानते हुए थाना अध्यक्ष कमल भाटी के निर्देशन में पुलिस टीम तत्काल जांच में जुट गई। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने और संबंधित लोगों से पूछताछ के बाद पुलिस के सामने कुछ ही समय में पूरी हकीकत सामने आ गई।
थाना प्रभारी कमल भाटी के अनुसार, रविवार शाम नाबालिग अनुराग ने पुलिस को सूचना दी कि स्कूटी और बाइक सवार कुछ लोगों ने उसे रास्ते में रोककर उसकी जेब से करीब 10 हजार रुपये और मोबाइल फोन लूट लिया है। लूट की सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही आसपास के लोगों से जानकारी जुटाना शुरू कर दिया।
पुलिस ने घटना की वास्तविकता जानने के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में नाबालिग के साथ उसका एक सहपाठी दिखाई दिया। पुलिस को यह तथ्य महत्वपूर्ण लगा, जिसके बाद सहपाठी को बुलाकर उससे पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान उसके बयानों में सामने आई जानकारी से कथित लूट की घटना पर संदेह गहराने लगा।
पुलिस के अनुसार, सहपाठी ने पूछताछ में बताया कि उसके तथा अन्य साथियों द्वारा नाबालिग के साथ किसी प्रकार की लूट नहीं की गई थी। नाबालिग पर रुपये वापस करने का दबाव था और इसी सिलसिले में उसने अपना मोबाइल फोन दोस्त के पास रख दिया था। पुलिस ने इसके बाद नाबालिग से भी पूरी घटना के संबंध में गहनता से पूछताछ की।
पूछताछ के दौरान नाबालिग ने पुलिस के सामने पूरी सच्चाई स्वीकार कर ली। उसने बताया कि उसने अपने दोस्त से पांच हजार रुपये उधार लिए थे। इनमें से चार हजार रुपये वह वापस कर चुका था, जबकि एक हजार रुपये अभी शेष थे। दोस्त द्वारा शेष रकम वापस करने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा था। इसी दौरान उसने अपना मोबाइल फोन दोस्त के पास रख दिया था।
नाबालिग को आशंका थी कि यदि घरवालों को मोबाइल फोन दोस्त के पास होने की जानकारी मिल गई तो उससे सवाल-जवाब होंगे। इसी डर और घरवालों को वास्तविकता बताने से बचने के लिए उसने कथित तौर पर लूट की मनगढ़ंत कहानी तैयार कर दी। उसने पुलिस को बताया कि कुछ लोगों ने रास्ते में उसे रोककर 10 हजार रुपये और मोबाइल लूट लिया है।
मामले की जांच में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, पूछताछ और नाबालिग के बयानों को आपस में मिलाकर देखा, जिसके बाद कथित लूट की सूचना झूठी पाए जाने की बात सामने आई। इस तरह थाना अध्यक्ष कमल भाटी के निर्देशन में पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ से लूट की झूठी कहानी का कम समय में पर्दाफाश हो गया।
पुलिस ने नाबालिग को मामले की गंभीरता समझाते हुए भविष्य में इस तरह की झूठी सूचना देकर पुलिस को गुमराह न करने की कड़ी हिदायत दी। इसके बाद उसे आवश्यक समझाइश देकर उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
पुलिस की इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट हुआ कि किसी भी आपराधिक घटना की सूचना मिलने पर पुलिस केवल शिकायत के आधार पर निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय घटनास्थल, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित लोगों के बयानों की जांच कर वास्तविक तथ्यों तक पहुंचने का प्रयास करती है। थाना अध्यक्ष कमल भाटी की सक्रियता और पुलिस टीम की तत्परता से एक हजार रुपये के विवाद में रची गई कथित लूट की झूठी कहानी सामने आ गई।
