जीते जी मुक्ति मिलै , सत्य धर्म जहां होय: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
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“सादर जय सियाराम”
सदा भलाई जो करै, बुरौ कहें नहीं कोय ।
जीते जी मुक्ति मिलै , सत्य धर्म जहां होय ।।
अर्थात : जीते जी मुक्ति उसी को प्राप्त होती है ।
जीते जी मुक्ति उसी को मिलती है ।
जो निस्वार्थ भाव से दूसरों की सेवा और सहयोग में अपने जीवन को खपाता है , जो निस्वार्थ भाव से दुसरो की सेवा में अपने जीवन को तपाता है , तथा सत्य और धर्म का पालन पूरी निष्ठा पूर्वक निभाता है ।
उसी को जीते जी मुक्ति मिलती है ।
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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