Etawah News: अंतिम यात्रा में उमड़ा भक्तों व क्षेत्रवासियों का सैलाब, महान संत श्री श्री 1008 खड़ेश्वरी महाराज ने किया अंतिम दर्शन
*इंसानी भाईचारे और प्रेम-सद्भाव का संदेश देने वाले रंगे बाबा पंचतत्व में विलीन*
रिपोर्ट एम एस वर्मा मनोज कुमार TTN 24 NEWS
जसवंतनगर/ इटावा: सराय भूपत कटेखेड़ा निवासी इंसानी भाईचारे, प्रेम और सद्भाव का संदेश देने वाले क्षेत्र के लोकप्रिय संत रक्षपाल दास उर्फ रंगे बाबा का 75 वर्ष की उम्र में रात्रि के समय हृदय गति रुकने से निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही आसपास के गांवों और क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। शनिवार को निकली उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में भक्तों, ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों का हुजूम उमड़ पड़ा। हर आंख नम थी और लोग नम भाव से अपने प्रिय बाबा को अंतिम विदाई देने पहुंचे।
रंगे बाबा सरल, सहज और मिलनसार स्वभाव के लिए जाने जाते थे। वह हमेशा लोगों को इंसानी भाईचारे, आपसी प्रेम, सद्भाव और एक-दूसरे का सम्मान करने का संदेश देते थे। यही वजह थी कि क्षेत्र के लोगों में उनके प्रति गहरा सम्मान और आत्मीयता थी।
बताया जाता है कि बाबा रक्षपाल दास उर्फ रंगे बाबा महान संत श्री श्री 1008 खड़ेश्वरी महाराज के साथ पैदल चारों धाम की यात्रा भी कर चुके थे। शनिवार को उनके अंतिम संस्कार में स्वयं खड़ेश्वरी महाराज पहुंचे। इस दौरान संत और उनके अनुयायियों ने बाबा की आत्मा की शांति के लिए ‘राम-राम’ की माला का जाप किया। धार्मिक रीति-रिवाजों के बाद बाबा का अंतिम संस्कार किया गया।
डेढ़ माह पहले हुआ था हार्ट का ऑपरेशन
परिजनों एवं भक्तों के अनुसार करीब डेढ़ माह पूर्व रक्षपाल दास उर्फ रंगे बाबा की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। भक्त उन्हें उपचार के लिए सैफई ले गए, जहां उनके हृदय का ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन के बाद उनकी तबीयत में काफी सुधार हुआ था और वह सामान्य रूप से लोगों से मिल-जुल रहे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि इतनी जल्दी वह सभी को छोड़कर इस दुनिया से चले जाएंगे।
‘हमें नहीं पता था कि ईश्वर रूपी इंसान हमसे विदा हो जाएगा’
बाबा को अंतिम बार याद करते हुए मोहम्मद आमीन ने बताया कि रक्षाबंधन के दिन गांव में सभी लोग एक-दूसरे को भुजरियां देकर त्योहार की बधाई दे रहे थे। इसी दौरान वह बाबा रक्षपाल दास के घर पहुंचे। बाबा अपने दरवाजे पर चारपाई पर बैठे हुए थे। मोहम्मद आमीन ने बताया कि उस समय बाबा को देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे कोई ईश्वर रूपी इंसान शांत भाव से बैठा हो।

उन्होंने बाबा को भुजरियां दीं, तो बाबा ने दोनों हाथ उनके सिर पर रखकर आशीर्वाद दिया। इसके बाद बाबा ने गांव के अन्य लोगों से भी हंसी-खुशी मुलाकात की। मोहम्मद आमीन ने भावुक होकर कहा कि “हमें नहीं पता था कि उस समय बाबा हम सभी को अपना अंतिम आशीर्वाद देकर जा रहे हैं। कौन जानता था कि ईश्वर रूपी यह इंसान इतनी जल्दी हम सबके बीच से चला जाएगा।”
चार पुत्र और एक पुत्री सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए
रक्षपाल दास उर्फ रंगे बाबा अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके चार पुत्र दिनेश यादव, उपदेश यादव उर्फ पीता भाई, आदेश यादव और अरविन्द यादव तथा एक पुत्री शशि यादव हैं। बाबा के निधन से परिवार के साथ-साथ उनके अनुयायियों और क्षेत्रवासियों में भी गहरा शोक है।
*अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़*
अंतिम यात्रा एवं अंतिम संस्कार में राधेश्याम मामा आदतिया, लाखन सिंह यादव, संजीव यादव रावण, वीरेंद्र सिंह यादव, सराय भूपत प्रधानपति रमेश यादव, दंगल सिंह चौहान, भाजपा नेता नवल शुक्ला, अजय यादव उर्फ टी डबलू, ब्रजपाल यादव टीटू, रामोतार यादव, डॉ. गिरीश यादव, मुन्नी यादव, भप्पू यादव (लक्ष्मी होटल वाले), सुभाष यादव, सत्यवीर यादव, सुरेंद्रपाल सिंह यादव (फौजी, टूंडला), गजेंद्र पाल यादव, दिलीप यादव, नरेश डीलर, सपा नेता सौरभ यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी एवं क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
सभी ने बाबा रक्षपाल दास उर्फ रंगे बाबा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। अंतिम यात्रा के दौरान माहौल पूरी तरह गमगीन रहा। लोगों की आंखों में आंसू थे और हर जुबां पर बाबा की सरलता, मिलनसार स्वभाव और इंसानी भाईचारे की सीख की चर्चा थी।
बाबा रक्षपाल दास उर्फ रंगे बाबा भले ही आज पंचतत्व में विलीन हो गए हों, लेकिन इंसानी भाईचारे, प्रेम, सद्भाव और मानवता का जो संदेश उन्होंने अपने जीवन में दिया, वह लंबे समय तक लोगों के दिलों में जीवित रहेगा।
