लोकेशन/नरसिंहपुर /
डिवीजन हेड पंकज पाल
कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह ने बैंकिंग योजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर लक्ष्य पूर्ति में तेजी लाने के दिए निर्देश
डीएलसीसी एवं डीएलआरसी की समीक्षा बैठक सम्पन्न
जबलपुर संभाग के नरसिंहपुर जिला की कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समन्वय समिति (डीएलसीसी) एवं जिला स्तरीय समीक्षा समिति (डीएलआरसी) की समीक्षा बैठक कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में सम्पन्न हुई। बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक के एलडीओ श्री अंकुश सिन्हा, अग्रणी जिला प्रबंधक (एलडीएम) श्री विकास पवार, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा जिले में संचालित विभिन्न बैंकों के जिला समन्वयक उपस्थित रहे।
बैठक में जिले में बैंकिंग गतिविधियों एवं शासकीय योजनाओं के माध्यम से हितग्राहियों को उपलब्ध कराई जा रही ऋण सुविधाओं की विस्तार से समीक्षा की गई। जून 2026 तक के जमा-साख अनुपात, वार्षिक साख योजना, बैंकवार एवं क्षेत्रवार अग्रिम की उपलब्धि तथा जिले में एनपीए की स्थिति की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने बैंकवार प्रगति की जानकारी ली।
इस दौरान प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के स्व-सहायता समूहों, पशुपालन, मत्स्य, जनजातीय कार्य, अंत्यावसायी एवं उद्यानिकी विभाग से संबंधित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। साथ ही ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार एवं कौशल विकास से जोड़ने के लिए संचालित आरसेटी की गतिविधियों की भी जानकारी ली गई।
कलेक्टर श्रीमती सिंह ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न शासकीय योजनाओं में निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति की स्थिति की समीक्षा करते हुए बैंक अधिकारियों से लक्ष्य पूर्ति में आ रही कठिनाइयों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचाना सभी संबंधित अधिकारियों एवं बैंक अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्देश दिए कि हितग्राहियों के ऋण प्रकरणों के निराकरण में अनावश्यक विलंब न हो तथा विभागीय अधिकारी एवं बैंक अधिकारी आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। बैंक स्तर पर किसी प्रकार की समस्या आने पर संबंधित विभागीय अधिकारी बैंक अधिकारियों से तत्काल संपर्क कर उसका निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने योजनाओं की लक्ष्यवार एवं समयबद्ध प्रगति पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ मिल सके।
