एक दिन आत्मचिंतन करने से जीवन नहीं सुधरता: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
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“सादर जय सियाराम”
“आज की सत्संग वार्ता आत्मचिंतन पर”
“आत्मचिंतन का महत्व”
1-आत्म जागरूकता : इसमें व्यक्ति अपनी ताकत और कमियां का सही पता चलता है ।
2-मानसिक शांति: अपनी गलतियों को स्वीकार करने और क्रोध को कम करने में मदद मिलती है ।
3-साकारात्मक बदलाव: स्वभाव , आचरण और संस्कार में सुधार होता है ।
4-उन्नति का मार्ग: दुसरो में दोष देखने के बजाय खुद पर ध्यान देने से जीवन में प्रगति होती है
आत्मचिंतन कैसे करें ?
1-एक शांत जगह चुनें जहां कोई आपको परेशान न करें ।
2-दिनभर के अपने कार्यों और व्यवहार के बारे में सोचें
3-निष्पक्ष होकर अपनी गलतियों और कमियों को पहचानें ।
4-और भविष्य में बेहतर और साकारात्मक आचरण करने का संकल्प लें ।
“आत्मचिंतन=सतत प्रक्रिया”
1-स्वयं की कमियों को सुधारना ,
कमियां मिटती नहीं , सुधरती हैं ।
सिर्फ एक दिन आत्मचिंतन करने से जीवन नहीं सुधरता है
रोज सिर्फ 5 मिनट=365 दिन = नया जीवन
“स्वाध्यायान्मा प्रमद:” स्वाध्याय और आत्मचिंतन में प्रमाद नहीं नहीं करना चाहिए
2-आत्मचिंतन से गलती दिखती है ।
और सुधार का मार्ग प्रशस्त होता है ।
3-आत्मचिंतन स्वयं की कमियों को सुधारने और जीवन को दिशा देने की सतत प्रक्रिया है ।
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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एक दिन आत्मचिंतन करने से जीवन नहीं सुधरता: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
