एक दिन आत्मचिंतन करने से जीवन नहीं सुधरता: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

एक दिन आत्मचिंतन करने से जीवन नहीं सुधरता: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

 

🙏🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹

“सादर जय सियाराम”

“आज की सत्संग वार्ता आत्मचिंतन पर”

“आत्मचिंतन का महत्व”

1-आत्म जागरूकता : इसमें व्यक्ति अपनी ताकत और कमियां का सही पता चलता है ।

2-मानसिक शांति: अपनी गलतियों को स्वीकार करने और क्रोध को कम करने में मदद मिलती है ।

3-साकारात्मक बदलाव: स्वभाव , आचरण और संस्कार में सुधार होता है ।

4-उन्नति का मार्ग: दुसरो में दोष देखने के बजाय खुद पर ध्यान देने से जीवन में प्रगति होती है

आत्मचिंतन कैसे करें ?

1-एक शांत जगह चुनें जहां कोई आपको परेशान न करें ।

2-दिनभर के अपने कार्यों और व्यवहार के बारे में सोचें

3-निष्पक्ष होकर अपनी गलतियों और कमियों को पहचानें ।

4-और भविष्य में बेहतर और साकारात्मक आचरण करने का संकल्प लें ।

“आत्मचिंतन=सतत प्रक्रिया”

1-स्वयं की कमियों को सुधारना ,

कमियां मिटती नहीं , सुधरती हैं ।

सिर्फ एक दिन आत्मचिंतन करने से जीवन नहीं सुधरता है

रोज सिर्फ 5 मिनट=365 दिन = नया जीवन

“स्वाध्यायान्मा प्रमद:” स्वाध्याय और आत्मचिंतन में प्रमाद नहीं नहीं करना चाहिए

2-आत्मचिंतन से गलती दिखती है ।

और सुधार का मार्ग प्रशस्त होता है ।

3-आत्मचिंतन स्वयं की कमियों को सुधारने और जीवन को दिशा देने की सतत प्रक्रिया है ।

[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]

🙏🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *