गुरुदेव भी शिष्य की हजार गलतियां देखकर भी कहता है-“कोई बात नहीं बेटा:आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
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“सादर जय सियाराम”
“गुरु को मां क्यों कहा गया है?” कितना सुन्दर प्रश्न है ?
ये बात सीधे हृदय में उतरती है
1- गुरुदेव मां की तरह क्षमा करते है ।
“पिता की तुलना में मां आश्रित के दोषों को जल्दी भूला देती है”
पिता=अनुशासन , नियम , दंड
मां=ममता , क्षमा , गोद
शिष्य की हजार गलतियां होने पर भी गोद में बिठाकर कहता है-
“कोई बात नहीं बेटा , फिर से उठो ”
गुरुदेव भी शिष्य की हजार गलतियां देखकर भी कहता है-
“कोई बात नहीं बेटा , फिर शुरू करो”
मां अपने पुत्र को अन्न से पोषण करती है ।
गुरुदेव अपने शिष्य को ज्ञान से पोषण करते हैं ।
मां रात भर जागकर बच्चे को देखती है ।
उसी प्रकार से गुरुदेव रात भर जागकर शिष्य के कल्याण का उपाय सोचते है ।
गुरुदेव अपना ज्ञान शिष्य को बेचते नहीं ।
गुरु दक्षिणा भी शिष्य की भलाई के लिए ही मांगता है ।
गुरु माता गुरु पिता गुरु दैवो महेश्वर:
गुरु ही माता है , गुरु ही पिता है , गुरु ही महेश्वर है ।
गुरुदेव में माता पिता दोनों का भाव होता है ।
पिता से मार्गदर्शन और मां से ममता दोनों मिलती है ।
क्योंकि मां के बिना जीवन अधूरा है ।
और गुरुदेव के बिना जीवन निरर्थक है ।
इसलिए गुरुदेव को मां कहा गया है ।
“गुरु कृपा केवलं शिष्यस्य परम मंगलम्”
सादर जय सियाराम 🙏
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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