पुरुषोत्तम को जानना भक्ति का आरंभ हैं: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

पुरुषोत्तम को जानना भक्ति का आरंभ हैं: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

 

🙏🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹

“सादर जय सियाराम”

“आज की सत्संग वार्ता पुरुषोत्तम तत्व का दर्शन”

पुरुषोत्तम कौन हैं ?

1-पुरुषोत्तम वही जो जंग के विश्राम हैं ।

संसार के लोग भाग रहे हैं दौड़ रहें हैं , सबको विश्राम चाहिए

धन में विश्राम नहीं , पद में विश्राम नहीं , भोग में विश्राम नहीं , सच्चा विश्राम कहां है ?

पुरुषोत्तम में ।

जैसे थका हुआ बालक मां के गोद में विश्राम पाता है , वैसे ही थका हुआ जीव पुरुषोत्तम के चरणों में विश्राम पाता है ।

वही जंग विश्राम हैं ।

2-पुरुषोत्तम वही जो मंगल के धाम हैं-

मंगल कहां हैं ?

जहां पुरुषोत्तम हैं , वही मंगल है ।

जिस हृदय में पुरुषोत्तम बसते हैं , वहु मंगल धाम बन जाता है ।

उनका नाम पुरुषोत्तम का नाम मंगल है , पुरुषोत्तम का धाम मंगल है ।

पुरुषोत्तम का काम मंगल है ।

3-पुरुषोत्तम पूरण काम हैं –

संसार में सबकी कामनाएं अधूरी है , एक पूरी होती है तो दूसरी उठ जाती है , पर पुरुषोत्तम को मिलते ही , पुरुषोत्तम को प्राप्त होते ही

सारी सिद्धियां , सारी कामनाएं पूर्ण हो जाती हैं ।

क्योंकि पुरुषोत्तम पूरण काम हैं ।

पुरुषोत्तम को पाने के बाद कुछ शेष नहीं रह जाता है ।

पुरुषोत्तम को जानों ,

पुरुषोत्तम को जानना क्या है ?

पुरुषोत्तम को जानना , अर्थात पुरुषोत्तम तत्व को जानना और पुरुषोत्तम तत्व से जानना ।

दो बातें हैं-

पहला-पुरुषोत्तम तत्व के स्वरुप को जानना , उनके नाम को , उनके धाम को , उनके लीला को , विश्राम स्वरुप को मंगलमय स्वरुप को , पूरण काम स्वरुप को जानना ।

दूसरा-पुरुषोत्तम तत्व से जानना-

अर्थात सब कुछ पुरुषोत्तम पुरुषोत्तम के द्वारा ही जानना

दुनिया को पुरुषोत्तम की दृष्टि से देखना ।

जब आंख पर पुरुषोत्तम तत्व का चश्मा लग जाते , तो जगत भी विश्राममय दिखता है ,

मंगलमय दिखता है ।

पुरुषोत्तम को जानना ज्ञान है

पुरुषोत्तम तत्व से जानना विज्ञान है , पुरुषोत्तम को जानना भक्ति का आरंभ हैं ,

और पुरुषोत्तम तत्व से जानना भक्ति की पूर्णता है ।

राजा किसके पाहुने और जोगी किसके मीत , राजा और जोगी स्वतंत्र होते हैं ।

वह स्वतंत्रा भी तभी सार्थक है , जब वह। पुरुषोत्तम को जानने में लगे ।

पुरुषोत्तम को जानने का फल क्या है ?

पुरुषोत्तम को जानों , पुरुषोत्तम को मानों और पुरुषोत्तम का हो जावों ।

पुरुषोत्तम को जानना ही मानने तक ले जाता है और मानना ही जाने तक ले जाता है ।

हमारा परिवार-पुरुषोत्तम

[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]

🙏🙏🌹🌹🙏🙏🌹🌹

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *