तीन चीज लेकर जाओं प्रणाम , सेवा और परिप्रश्न – सच्ची जिज्ञासा: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज
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“सादर जय सियाराम”
जिज्ञासा नहीं है तो जीवन बोझ है , और जिज्ञासा है तो जीवन ही खोज है ।
अपने गुरुजनों के पास जाओं तो तीन चीज लेकर जाओं प्रणाम , सेवा और परिप्रश्न – सच्ची जिज्ञासा ।
जिस शिष्य में जिज्ञासा नहीं हो गुरुदेव उस शिष्य को क्या उपदेश करेंगे ?
शास्त्रों की शुरुआत ही जिज्ञासा से होती है ।
जिज्ञासा क्या है ?
जिज्ञासा का अर्थ है ।
जानने की इच्छा ,
संस्कृत में- ज्ञातुम् इच्छा- जिज्ञासा ।
शिष्य के जिज्ञासा से ही गुरुदेव प्रसन्न होते हैं ।
सादर जय सियाराम ,
[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]
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