हेडिंग: जैतपुर क्षेत्र में धड़ल्ले से जलाई जा रही पराली, जहरीले धुएं से आबोहवा पर मंडराया प्रदूषण का खतरा
प्रशासनिक सख्ती और जागरूकता के दावों के बीच पराली जलाने का सिलसिला जारी, जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
इसरार अहमद, जिला संवाददाता अम्बेडकरनगर
अम्बेडकरनगर। जिले के जैतपुर थाना क्षेत्र में पराली जलाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। खेतों में फसल अवशेषों को खुलेआम आग के हवाले किया जा रहा है। पराली जलने से उठने वाला धुआं धीरे-धीरे वातावरण में फैल रहा है, जिससे क्षेत्र की आबोहवा प्रदूषित होने की आशंका बढ़ गई है।एक तरफ सरकार और प्रशासन किसानों को पराली न जलाने के लिए लगातार जागरूक कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जैतपुर क्षेत्र में इन प्रयासों का असर धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। पराली जलाने से निकलने वाला धुआं सांस संबंधी परेशानियों के साथ बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर क्षेत्र में पराली जलाने की घटनाओं पर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर क्यों नहीं पड़ रही है? क्या संबंधित विभागों की ओर से खेतों का निरीक्षण और निगरानी की जा रही है या फिर सरकारी निर्देश केवल कागजों तक ही सीमित हैं?अब जरूरत है कि कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्र में निगरानी बढ़ाएं और किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के प्रति जागरूक करें, ताकि पर्यावरण और आमजन के स्वास्थ्य को प्रदूषण के खतरे से बचाया जा सके।
