TTN24 नेशनल न्यूज़ चैनल के लीगल एडवाइजर अधिवक्ता राजेश कुमार की कलम से ✍️
वर्दी का अहंकार और वकीलों की शरण: हकीकत का आईना
वर्दी सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक है। लेकिन जब कुछ अधिकारी पद और शक्ति को कानून से ऊपर समझने लगते हैं, तो जनता के अधिकार और लोकतांत्रिक मर्यादाएं आहत होती हैं। अधिवक्ताओं के साथ अभद्रता करना, उन्हें धमकाना या सवाल पूछने पर अपमानित करना किसी भी अधिकारी की गरिमा के अनुकूल नहीं है।
कुर्सी और अधिकार हमेशा साथ नहीं रहते। जब किसी अधिकारी पर कार्रवाई होती है या उसे अदालत में अपना पक्ष रखना पड़ता है, तब अधिवक्ता की भूमिका का महत्व स्पष्ट होता है। जिन वकीलों के प्रति कभी तिरस्कार दिखाया गया हो, उन्हीं से कानूनी सहायता मांगने की परिस्थिति भी आ सकती है।
यही हकीकत का आईना है—पद अस्थायी है, लेकिन कानून के प्रति जवाबदेही स्थायी है।
अधिवक्ता का कर्तव्य प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करना है। सहायता मांगने वाला अधिकारी हो या आम नागरिक, उसे अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। यही पेशे की गरिमा और न्याय की बुनियाद है।
पुलिस और अधिवक्ता, दोनों की भूमिका न्याय व्यवस्था में महत्वपूर्ण है। उनके बीच संवाद और परस्पर सम्मान जनता का भरोसा मजबूत करते हैं। किसी एक व्यक्ति का अनुचित आचरण पूरी पुलिस या पूरे अधिवक्ता समाज की पहचान नहीं बनना चाहिए।
वर्दी की असली ताकत कानून का पालन कराने में है और वकालत की असली ताकत अधिकारों की रक्षा करने में। अहंकार से टकराव बढ़ता है; मर्यादा से न्याय मजबूत होता है।
