41 में से 40 योजनाएं फर्जी,फोटो की फोटो खींचकर जियो-टैगिंग… फिर भी जमुई में लीपापोती जारी!
•मनरेगा आयुक्त का आदेश भी रद्दी के भाव,10 दिनों की मियाद खत्म,अफसर मौन!•
रिपोर्ट-स्टेट हेड-बिहार/झारखंड
पटना(बिहार)।ग्रामीण विकास विभाग बिहार सरकार द्वारा कराई गई उच्चस्तरीय जांच में जमुई जिले के ई.अलीगंज प्रखंड में मनरेगा योजनाओं के नाम पर जारी भारी धांधली का पर्दाफाश हुआ है।लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मनरेगा आयुक्त अनन्या सिंह(आईएएस)द्वारा 03 जुलाई 2026(पत्रांक 1044)को जांच रिपोर्ट भेजकर दोषी कर्मचारियों पर 10 दिनों के भीतर कार्रवाई करने का अल्टीमेटम दिए जाने के बावजूद स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मौन बैठा हुआ है।
•जांच रिपोर्ट के 7 बड़े और सनसनीखेज खुलासे•
कागजों पर 80×80 फीट का तालाब,जमीन पर निकला 42×74 का:
योजना संख्या 0550010009/IF/20980634 में कागजों में तालाब 80×80 फीट दर्ज था,लेकिन धरातल पर माप करने पर केवल 42x74x5 फीट ही पाया गया।
•फोटो की फोटो खींचकर फर्जी जियो-टैगिंग:
योजना संख्या 20549131,20613746, 20593251 आदि में निर्माण के दूसरे चरण में मोबाइल/स्क्रीन पर फोटो की फोटो खींचकर फर्जी अपलोडिंग की गई।
•तालाबों में पानी के बजाय हो रही खेती:
कुल 41 योजनाओं में केवल एक तालाब को छोड़कर अन्य कोई भी उपयोगी नहीं पाया गया। किसी भी तालाब में इनलेट/आउटलेट की व्यवस्था नहीं थी और कई तालाबों में पानी के बजाय खेती पाई गई!
•एक ही बांध पर दो-दो योजनाओं का पैसा डकारा:
•दो अलग-अलग तालाब योजनाओं(योजना सं० 20625055 एवं 20611774)के लिए एक ही बांध दिखाकर राशि की दोहरी लूट की गई।
•नियम विरुद्ध जेई स्तर पर सीधा भुगतान:
बिना किसी भौतिक सत्यापन के केवल कनीय अभियंता(जेई)की मापी पुस्तिका(एमबी)के आधार पर राशि का भुगतान कर दिया गया,जो मनरेगा नियमों का सरेआम उल्लंघन है।
•निजी लाभ की योजनाओं में फर्जीवाड़ा:
निजी लाभ की योजनाओं में लाभुक के परिवार के किसी सदस्य ने काम ही नहीं किया,फिर भी राशि का गबन कर लिया गया।
नजरी नक्शा और एनओसी गायब,एमबी में ओवरराइटिंग:
अधिकांश कार्यस्थलों से नागरिक सूचना पट्ट(सीआईबी)गायब मिले।अभिलेखों में एनओसी और नक्शा था ही नहीं,तथा मापी पुस्तिका(एमबी)में ओवरराइटिंग पाई गई।
बड़ा सवाल:आखिर दोषी अफसरों व बिचौलियों पर मेहरबान क्यों है तंत्र?
शिकायतकर्ता मनोज कुमार मेहता की पहल पर राज्य स्तरीय जांच दल ने 12 और 13 मार्च को अलीगंज में जांच की थी।जांच में घोटाला साबित होने और आईएएस अधिकारी द्वारा सख्त कार्रवाई के आदेश जारी होने के बावजूद हफ्तों बाद भी किसी पर गाज न गिरना स्थानीय तंत्र की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
