लोकेशन आलोट जिला ब्यूरो डॉक्टर सुनील चोपड़ा
मन की शुद्धि मंत्रों से करना चाहिए: साध्वी चारित्र कला श्रीजी
150 से अधिक श्रावकों ने किया दीपक एकासना
*आलोट।* जैन भवन में धर्मसभा को संबोधित करते हुए *साध्वी चारित्र कला श्रीजी* ने कहा कि पानी से शरीर की शुद्धि 4 घंटे से अधिक नहीं रह सकती, जबकि शास्त्रों में लिखे गए मंत्रों के उच्चारण से शरीर शुद्ध होकर मोक्ष मार्ग की ओर ले जाता है।
उन्होंने कहा कि शरीर में कई प्रकार की अशुद्धियां हैं, हमें इन्हें दूर करना है। शुद्ध मन से भगवान की भावना करते हैं तो भगवान हमारी भावनाओं को अच्छी तरह सुनते हैं। कोई भी कार्य हो उसे एकाग्र मन से करना चाहिए।
साध्वी श्री ने *श्रेष्ठी धनेंद्र देव* का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने नील रत्न से जड़ी *नागेश्वर पार्श्वनाथ* की प्रतिमा प्रतिष्ठित करवाई थी। आज यह प्रतिमा आलोट के समीप *नागेश्वर उन्हेल* में विराजित है।
उन्होंने आगे कहा कि *महाविदेह क्षेत्र* में *सिमंधर स्वामी* जीवित तीर्थंकर हैं। जब भगवान महावीर भरत क्षेत्र में मोक्ष गए तब सिमंधर स्वामी महाविदेह क्षेत्र में तीर्थंकर बने थे और आज भी समवसरण में धर्मदेशना दे रहे हैं। हम उनकी धर्म आराधना कर मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ सकते हैं।
150 से अधिक ने किया दीपक एकासना, तप-त्याग की प्रेरणा

साध्वी चारित्र कला श्रीजी की निश्रा में 150 से अधिक श्रावक-श्राविकाओं ने दीपक एकासना कर धर्म आराधना की।
*दीपक एकासना में एक समय भोजन के पूर्व दीपक जलाकर साध्वीजी की क्रियाओं के पश्चात एकासना प्रारंभ किए गए। एकासना करने से कर्मों की निर्जरा होती है, इंद्रियों पर नियंत्रण आता है और मन शुद्ध होकर मोक्ष मार्ग प्रशस्त होता है। दीपक अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है।*
दीपक एकासना के लाभार्थी *संजय कुमार, श्रेया कुमार डूंगरवाल परिवार* थे। उन्होंने प्रभावना भी की।

त्रिस्तुतिक संघ अध्यक्ष संजय डूंगरवाल एवं चातुर्मास समिति अध्यक्ष सुनील कुमार शिवकुमार पारीक* ने बताया कि चातुर्मास पर्व में धर्म आराधना का दौर प्रतिदिन चल रहा है। रविवार दोपहर में बच्चों का 2 घंटे का धार्मिक शिविर आयोजित किया गया जिसमें अधिकांश बच्चों ने उत्साह से भाग लिया। साध्वी मंडल द्वारा उन्हें धार्मिक बातों का ज्ञान भी करवाया गया। प्रतिदिन सुबह 9:30 से 10:30 बजे तक साध्वीजी के जैन भवन में व्याख्यान चल रहे हैं और दोपहर व शाम को धार्मिक आयोजन भी किए जा रहे हैं। समाज जन उत्साह के साथ सभी कार्यक्रमों में भाग लेकर धर्म आराधना कर रहे हैं।
