मथुरा के वृंदावन में 1432 गज जमीन के सौदे पर उठे सवाल, ₹1.45 करोड़ के भुगतान के बाद खसरा नंबरों की उलझन सामने आई

मथुरा के वृंदावन में 1432 गज जमीन के सौदे पर उठे सवाल, ₹1.45 करोड़ के भुगतान के बाद खसरा नंबरों की उलझन सामने आई

 

ग्राम हद नगला की जमीन को लेकर थाना जैत में FIR, बिल्डर बालमुकुंद शर्मा समेत पांच लोगों के नाम; राजस्व अभिलेख, मौके की स्थिति और सीमांकन जांच का अहम हिस्सा

 

ब्यूरो चीफ प्रताप सिंह

मथुरा/वृंदावन।

तीर्थनगरी वृंदावन और आसपास के क्षेत्र में तेजी से बढ़ते जमीन के कारोबार के बीच ग्राम हद नगला की एक बेशकीमती जमीन का मामला पुलिस जांच के दायरे में आ गया है। करीब 1432 गज जमीन के नाम पर ₹1.45 करोड़ के कथित लेनदेन के बाद सामने आए खसरा नंबरों के विवाद ने पूरे मामले को पेचीदा बना दिया है। शिकायतकर्ता तीर्थ चंद गर्ग की तहरीर के आधार पर थाना जैत में FIR संख्या 0627/2026 दर्ज की गई है। प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 338, 336(3) और 340(2) के तहत कार्रवाई दर्ज होने की बात सामने आई है।

मामले में बिल्डर बालमुकुंद शर्मा समेत पांच लोगों को नामजद किया गया है। पुलिस ने प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन को खसरा संख्या 204 की भूमि बताकर सौदा कराया गया, लेकिन बाद में मौके पर पहुंचने पर जमीन की पहचान और वास्तविक स्थिति को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

जमीन खरीदने के लिए हुई थी मुलाकात

FIR में दर्ज शिकायत के अनुसार दिल्ली निवासी तीर्थ चंद गर्ग अपने भतीजे चेतन गर्ग के साथ वृंदावन क्षेत्र में आवासीय जमीन खरीदना चाहते थे। इसी सिलसिले में उनकी मुलाकात बालमुकुंद शर्मा से हुई। शिकायतकर्ता के मुताबिक बालमुकुंद शर्मा ने जमीन दिखाने तथा सौदा कराने में मदद करने की बात कही।

इसके बाद कथित तौर पर बालमुकुंद शर्मा के माध्यम से उनकी मुलाकात कपिल जग्गी, कृष्ण कुमार खंडेलवाल, योगेंद्र पाल खंडेलवाल और मीना कुमारी सहित अन्य संबंधित लोगों से हुई। FIR में इन्हीं लोगों से जुड़े लेनदेन और जमीन की पहचान को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है।

पुलिस जांच में अब यह महत्वपूर्ण होगा कि जमीन दिखाने, उसकी पहचान बताने और दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में किस व्यक्ति की क्या भूमिका रही थी।

1432 गज जमीन के लिए ₹1.45 करोड़ का भुगतान

शिकायतकर्ता के अनुसार जिस जमीन का सौदा कराया गया, उसे ग्राम हद नगला स्थित खसरा संख्या 204 की भूमि बताया गया था। उपलब्ध विवरण में संबंधित भूखंड का क्षेत्रफल करीब 0.11973 हेक्टेयर बताया गया है।

शिकायत के अनुसार 10 जून 2024 को कृष्ण कुमार खंडेलवाल और कपिल जग्गी से बैनामा कराया गया तथा इसके एवज में ₹1.45 करोड़ की राशि RTGS के माध्यम से भुगतान की गई।

31657071260627_तीर्थ चन्द गर्ग

FIR में योगेंद्र पाल खंडेलवाल को इस लेनदेन का गवाह बताए जाने का भी उल्लेख है।

शिकायतकर्ता की ओर से जमीन के बाजार मूल्य को इससे काफी अधिक बताया गया है। हालांकि बाजार मूल्य से संबंधित दावे का वास्तविक सत्यापन राजस्व विभाग के रिकॉर्ड, उस समय लागू सर्किल रेट, संबंधित संपत्ति की स्थिति तथा स्वतंत्र बाजार मूल्यांकन से ही किया जा सकता है।

निर्माण कराने पहुंचे तो सामने आया विवाद

मामले में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता जमीन पर निर्माण कराने पहुंचे।

FIR के अनुसार 4 अप्रैल 2025 को तीर्थ चंद गर्ग अपने भतीजे और मजदूरों के साथ मौके पर निर्माण कार्य शुरू कराने पहुंचे। इसी दौरान खसरा संख्या 213 के पट्टेदार कैलाशपति पुत्र बुद्धाराम आदि की ओर से आपत्ति किए जाने की बात शिकायत में कही गई है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि मौके पर उन्हें बताया गया कि जिस भूमि को खसरा संख्या 204 की जमीन बताया गया था, उसकी वास्तविक स्थिति खसरा संख्या 208 और 213 से संबंधित भूमि से जुड़ी हो सकती है।

यहीं से विवाद का मुख्य प्रश्न सामने आया—आखिर जिस जमीन के लिए बैनामा कराया गया, उसकी वास्तविक पहचान क्या थी?

New Doc 09-03-2026 19.02

खसरा 204, 208 और 213 के बीच उलझा मामला

पूरे प्रकरण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जमीन के खसरा नंबरों की स्थिति है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि बाद में बैनामा और राजस्व अभिलेखों की जांच करने पर उन्हें बैनामे में दर्शाई गई दिशाओं और मौके की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर दिखाई दिया। आरोप यह भी है कि जिस भूखंड का सौदा खसरा संख्या 204 बताकर किया गया, वह राजस्व अभिलेखों के अनुसार उसी रूप में मौके पर उपलब्ध नहीं था।

हालांकि इस आरोप की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच, राजस्व अभिलेखों और विधिवत सीमांकन के बाद ही हो सकेगी।

यदि दस्तावेजों में दर्ज सीमाएं और मौके की स्थिति अलग निकलती हैं तो यह जांच का अहम बिंदु होगा कि बैनामा तैयार करते समय जमीन की पहचान किस आधार पर की गई थी।

IMG_2635 conv 1

कोर्ट से जुड़े दस्तावेज में भी स्थल-नक्शे का उल्लेख

मामले से संबंधित उपलब्ध दस्तावेजों में एक हस्तलिखित स्थल-नक्शे का भी उल्लेख सामने आया है। इसमें खसरा संख्या 204 के साथ आसपास के खसरा नंबर 208 और 213 अंकित बताए गए हैं।

नक्शे में मौके पर मौजूद निर्माण, कमरों तथा अलग-अलग सीमाओं को भी दर्शाया गया है। उपलब्ध दस्तावेज के नीचे 1 अगस्त 2026 की तारीख के साथ शिवपाल सिंह, अमीन ग्रेड-1, सिविल कोर्ट, मथुरा का नाम एवं हस्ताक्षर दिखाई देने की बात सामने आई है।

यह नक्शा इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विवाद का मूल ही जमीन की वास्तविक स्थिति, सीमाओं और राजस्व अभिलेखों में दर्ज खसरा संख्या को लेकर है।

हालांकि किसी भी नक्शे या दस्तावेज की अंतिम कानूनी प्रासंगिकता संबंधित न्यायालय अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा उसके सत्यापन और संदर्भ के आधार पर तय की जाएगी।

IMG_2635 conv

बैनामा और मौके की स्थिति में अंतर का आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि बैनामे में जमीन की जिन दिशाओं और सीमाओं का उल्लेख किया गया था, मौके पर स्थिति उससे अलग मिली।

यदि जांच में यह अंतर प्रमाणित होता है तो पुलिस के सामने यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि—

जमीन की पहचान किस दस्तावेज के आधार पर की गई थी?

खसरा संख्या 204 बताने वाला व्यक्ति कौन था?

1432 गज भूमि का मौके पर सीमांकन किसने कराया?

बैनामा तैयार होने से पहले राजस्व अभिलेखों की जांच हुई थी या नहीं?

भुगतान से पहले खरीदार को कौन-कौन से दस्तावेज दिखाए गए?

मौके पर खसरा 213 के पट्टेदार का कब्जा किस भूमि पर था?

 

*बैनामे में दर्ज सीमाएं और मौके की सीमाएं अलग क्यों बताई जा रही हैं?*

 

इन सवालों के जवाब जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

बालमुकुंद शर्मा की भूमिका भी जांच के दायरे में

इस प्रकरण में बिल्डर बालमुकुंद शर्मा का नाम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शिकायतकर्ता के कथन के अनुसार जमीन खरीदने की प्रक्रिया में उनकी मुलाकात बालमुकुंद शर्मा से हुई थी और उनके माध्यम से अन्य संबंधित व्यक्तियों से संपर्क हुआ।

हालांकि किसी व्यक्ति का FIR में नाम होना अपने आप में अपराध सिद्ध होने के समान नहीं है। उनकी वास्तविक भूमिका क्या थी, उन्होंने जमीन की पहचान किस आधार पर कराई और लेनदेन में उनकी क्या प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष भूमिका थी—इन सभी बिंदुओं का निर्धारण पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना है।

 

*पहले शिकायत, बाद में दर्ज हुई FIR*

 

FIR के अनुसार शिकायतकर्ता ने इससे पहले 20 जून 2026 को थाना जैत में शिकायत देने का दावा किया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उस समय मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।

इसके बाद 16 सितंबर 2026 को FIR दर्ज होने की बात सामने आई। मामले की जांच प्रशांत शर्मा, उपनिरीक्षक/अवर निरीक्षक को सौंपे जाने का उल्लेख है।

अब जांच एजेंसी के सामने बैंकिंग लेनदेन, बैनामा, राजस्व रिकॉर्ड, खसरा नक्शा, मौके की स्थिति, संबंधित पक्षों के बयान और अन्य दस्तावेजों का मिलान करना महत्वपूर्ण होगा।

 

*जमीन के बढ़ते कारोबार के बीच बड़ा सवाल*

वृंदावन और आसपास के क्षेत्र में जमीन की कीमतों तथा आवासीय एवं व्यावसायिक गतिविधियों के बढ़ने के बीच यह मामला जमीन खरीदने वाले लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण सवाल सामने रखता है।

किसी भी जमीन का सौदा केवल बैनामा देखकर पूरा कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। जमीन की खसरा संख्या, खतौनी, नक्शा, स्वामित्व, रास्ता, सीमाएं, कब्जा और मौके की पैमाइश का मिलान करना आवश्यक होता है।

इस मामले में भी अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि जिस भूमि का सौदा खसरा संख्या 204 के नाम पर किया गया, उसकी वास्तविक स्थिति राजस्व अभिलेखों और मौके के विधिवत सीमांकन में क्या निकलती है।

 

जांच के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर

फिलहाल इस पूरे प्रकरण में शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों की पुलिस जांच चल रही है। उपलब्ध समाचार रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *