न्याय की पैरवी करने वाला खुद न्याय की गुहार लगा रहा: बोकारो में अधिवक्ता ने लगाया हमले और धमकियों का आरोप
अधिवक्ता और परिवार की सुरक्षा पर सवाल; निष्पक्ष जांच एवं तत्काल कार्रवाई की मांग
TTN24 नेशनल न्यूज़ चैनल के लिए नेशनल ब्यूरो हेड एवं लीगल एडवाइज़र अधिवक्ता राजेश कुमार की रिपोर्ट, सिविल कोर्ट, बोकारो।
बोकारो। दूसरों को न्याय दिलाने के लिए अदालत में पैरवी करने वाला अधिवक्ता जब अपने परिवार की सुरक्षा के लिए गुहार लगाने लगे, तो यह समाज और पुलिस व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। बोकारो जिला बार एसोसिएशन के नियमित सदस्य अधिवक्ता शशिकांत कुमार शर्मा ने अपने पड़ोसियों पर परिवार को लगातार परेशान करने, पथराव, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं।
शर्मा के अनुसार, घटना 29 सितंबर 2026 की है। उस समय वह न्यायालय में अपना काम कर रहे थे और उनके परिजन घर पर मौजूद थे। उनका आरोप है कि पड़ोसियों ने उनके घर एवं परिवार को निशाना बनाकर ईंट-पत्थर फेंके। सूचना मिलने पर जब वह घर पहुंचे, तो उनके साथ भी मारपीट की गई।
अधिवक्ता का कहना है कि यह परेशानी एक दिन की नहीं है। उन्होंने अपनी और परिवार की सुरक्षा के लिए थाना, डीएसपी एवं पुलिस अधीक्षक स्तर पर बार-बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनकी शिकायत पर अब तक प्रभावी राहत नहीं मिली है। उन्होंने पुलिस के रवैये पर भी असंतोष जताया है।
शर्मा का आरोप है कि संबंधित लोग उनके अधिवक्ता होने का उपहास करते हुए पुलिस पर अपना प्रभाव होने का दावा करते हैं। उनके अनुसार, उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने और जान से मारने की धमकियां भी दी गई हैं। यदि जांच में ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह एक परिवार की सुरक्षा के साथ न्याय की पैरवी करने वाले व्यक्ति को भयभीत करने का गंभीर मामला होगा।
शिकायत का जवाब निष्पक्ष जांच से मिलना चाहिए
शर्मा के अनुसार, उनके आवेदन के बाद दूसरे पक्ष का आवेदन भी पुलिस ने स्वीकार किया। दोनों पक्षों की शिकायत लेना निष्पक्ष जांच का हिस्सा हो सकता है, लेकिन प्रत्येक शिकायत की स्वतंत्र जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई जरूरी है। किसी पक्ष के कथित प्रभाव या दबाव से जांच प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
इस मामले में घटना से जुड़े उपलब्ध वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, चिकित्सकीय अभिलेख तथा पूर्व शिकायतों की जांच वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकती है। धमकियों के आरोपों को देखते हुए परिवार की सुरक्षा का आकलन भी तत्काल किया जाना चाहिए।
अधिवक्ता की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था पर भरोसे का सवाल
हर नागरिक को सुरक्षित जीवन और अपनी शिकायत पर निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार है। अधिवक्ता भी इसी समाज का हिस्सा हैं। उनके पेशे को लेकर अपमान करना, हिंसा करना या झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देना स्वीकार्य नहीं है।
बोकारो के अधिवक्ता समुदाय को इस विषय पर शांतिपूर्ण और संगठित ढंग से अपनी बात रखनी चाहिए। बार एसोसिएशन के माध्यम से पुलिस प्रशासन को तथ्य एवं संबंधित अभिलेख सौंपकर सुरक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग की जा सकती है।
इस रिपोर्ट के माध्यम से बोकारो के पुलिस अधीक्षक एवं संबंधित थाना प्रभारी से आग्रह है कि अधिवक्ता शशिकांत कुमार शर्मा की शिकायत पर तत्काल संज्ञान लिया जाए, परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और जांच में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। गिरफ्तारी की आवश्यकता भी साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर तय हो।
न्याय के लिए आवाज उठाने वाला व्यक्ति स्वयं भय में जीने को विवश हो—यह स्थिति किसी भी सभ्य समाज के लिए चिंता का विषय है। शिकायत की निष्पक्ष जांच और समय पर कार्रवाई ही पुलिस व्यवस्था में विश्वास मजबूत करेगी।
यह रिपोर्ट अधिवक्ता द्वारा बताए गए घटनाक्रम और आरोपों पर आधारित है। पुलिस एवं दूसरे पक्ष का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी शामिल किया जाना चाहिए।
