बोकारो से ब्यूरो ⚖️ विशेष रिपोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट में समाप्त हुआ अधिवक्ता–बार एसोसिएशन विवाद
न्यायमूर्ति आनंद सेन के समक्ष समझौते के आधार पर याचिका का निस्तारण
रांची/बोकारो | TTN24 TIME TV EXPRESS
झारखंड उच्च न्यायालय, रांची में W.P.(C) No. 4814/2026 में दायर याचिका पर माननीय न्यायमूर्ति आनंद सेन ने 29 जुलाई 2026 को सुनवाई की। यह मामला बोकारो जिला बार एसोसिएशन और अधिवक्ता रंजीत कुमार उर्फ रंजीत गिरि के बीच उत्पन्न विवाद से संबंधित था।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता स्वयं न्यायालय में उपस्थित हुए। उनके साथ झारखंड स्टेट बार काउंसिल के प्रतिनिधि तथा बोकारो जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं महासचिव भी उपस्थित रहे।
याचिकाकर्ता ने क्या कहा?
याचिकाकर्ता ने न्यायालय के समक्ष कहा कि यदि उनसे कोई ऐसी भूल हुई है जिससे बार एसोसिएशन अथवा उसके पदाधिकारियों और सदस्यों की भावनाओं को ठेस पहुँची हो, तो वे उसके लिए खेद व्यक्त करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी कभी भी बार एसोसिएशन या उसके किसी सदस्य की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने की मंशा नहीं रही तथा वे सदैव बार की गरिमा बनाए रखना चाहते हैं।
बार एसोसिएशन का आश्वासन
बोकारो जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं महासचिव ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि याचिकाकर्ता को बार परिसर में पूर्ववत बैठने का स्थान (कुर्सी एवं टेबल) उपलब्ध कराया जाएगा तथा उन्हें विधि व्यवसाय करने की अनुमति दी जाएगी।
हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
न्यायालय ने भविष्य के लिए यह भी कहा कि यदि किसी सदस्य के विरुद्ध कार्रवाई आवश्यक हो, तो पहले झारखंड स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष को सूचित करना उचित होगा, ताकि विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाया जा सके और अधिवक्ताओं के बीच सौहार्द बना रहे।

अंतिम आदेश
दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के कारण माननीय न्यायालय ने याचिका का निस्तारण कर दिया तथा लंबित सभी अंतरिम आवेदन भी समाप्त कर दिए। साथ ही आदेश की प्रति प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बोकारो को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजने का निर्देश दिया गया।
📰 बोकारो जिला बार एसोसिएशन की प्रेस विज्ञप्ति
03 अगस्त 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बोकारो जिला बार एसोसिएशन ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में अधिवक्ता रंजीत कुमार उर्फ रंजीत गिरि की सदस्यता बहाल कर दी गई है। उन्हें पुनः बार परिसर में बैठकर वकालत करने की अनुमति दी गई है तथा संघ की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी देने का निर्णय लिया गया। प्रेस विज्ञप्ति के साथ हाईकोर्ट के आदेश की प्रति भी संलग्न की गई। �
