भारत-नेपाल सीमा के संवेदनशील रक्सौल में बाल सहायता समूह की बैठक; संदिग्ध बाल पलायन, भिक्षावृत्ति और मानव तस्करी की रोकथाम पर बनी रणनीति

रक्सौल स्टेशन पर बाल सुरक्षा को लेकर बड़ा मंथन, तस्करी रोकने के लिए एजेंसियों ने मजबूत किया साझा तंत्र

 

भारत-नेपाल सीमा के संवेदनशील रक्सौल में बाल सहायता समूह की बैठक; संदिग्ध बाल पलायन, भिक्षावृत्ति और मानव तस्करी की रोकथाम पर बनी रणनीति

 

रेलवे, RPF, GRP, SSB, CWC, चाइल्ड हेल्पलाइन और सामाजिक संगठनों ने समन्वित कार्रवाई पर दिया जोर

 

रक्सौल अनुमंडल संवाददाता | TTN24

रक्सौल, 21 अगस्त 2026।

 

भारत-नेपाल की खुली अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े रक्सौल में बच्चों की सुरक्षा और मानव तस्करी की रोकथाम को लेकर शुक्रवार को विभिन्न एजेंसियां एक मंच पर आईं। रक्सौल स्टेशन अधीक्षक कार्यालय में आयोजित बाल सहायता समूह की महत्वपूर्ण बैठक में रेलवे, सुरक्षा एजेंसियों, बाल संरक्षण तंत्र और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने बच्चों से जुड़े संवेदनशील मामलों में बेहतर समन्वय और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता पर चर्चा की।

 

बैठक में खास तौर पर रेलवे के माध्यम से होने वाले असुरक्षित बाल पलायन, अकेले या संदिग्ध परिस्थितियों में यात्रा कर रहे नाबालिगों, बाल भिक्षावृत्ति तथा मानव एवं बाल तस्करी से जुड़े जोखिमों पर मंथन किया गया। रक्सौल के अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती क्षेत्र और प्रमुख रेलवे जंक्शन होने के कारण यहां अतिरिक्त सतर्कता को जरूरी बताया गया।

 

संदिग्ध परिस्थितियों में मिले बच्चों पर रहेगी विशेष नजर

 

रेलवे स्टेशन और आसपास के क्षेत्रों में अकेले अथवा संदिग्ध परिस्थितियों में मिले बच्चों की समय रहते पहचान पर विशेष जोर दिया गया। ऐसे मामलों में संबंधित एजेंसियों और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को तत्काल सूचना देकर निर्धारित बाल संरक्षण प्रक्रिया के तहत कार्रवाई सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई।

 

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि किसी बच्चे को संभावित तस्करी, शोषण या असुरक्षित पलायन से बचा लेना ही पूरी कार्रवाई नहीं है। रेस्क्यू के बाद बच्चे की सुरक्षा, देखभाल और पुनर्वास तक विभिन्न संस्थाओं के बीच निरंतर समन्वय जरूरी है।

 

CWC की भूमिका अहम, रेस्क्यू के बाद संरक्षण पर फोकस

 

बैठक में बाल कल्याण समिति (CWC) की भूमिका पर भी विशेष चर्चा हुई। CWC से दिग्विजय कुमार ने बैठक में भाग लिया। बच्चों के रेस्क्यू के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें समिति के समक्ष प्रस्तुत करने तथा बच्चे के सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए संरक्षण, देखभाल, परिवार से पुनर्मिलन अथवा आवश्यक पुनर्वास की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।

 

सीमावर्ती क्षेत्र में मिलने वाले बच्चों के मामलों में यह व्यवस्था और महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि किसी बच्चे के असुरक्षित पलायन के पीछे तस्करी या शोषण की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए रेस्क्यू से लेकर पुनर्वास तक एक मजबूत संस्थागत व्यवस्था को जरूरी माना गया।

 

सामाजिक संगठनों की जमीनी भूमिका भी महत्वपूर्ण

 

बैठक में स्वच्छ रक्सौल के अध्यक्ष रणजीत सिंह ने मानव तस्करी और बाल सुरक्षा के मामलों में जमीनी स्तर पर मजबूत समन्वय, जागरूकता और निरंतर निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया। सीमावर्ती क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों अथवा बच्चों से जुड़े मामलों की सूचना समय पर संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाने में सामाजिक संगठनों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया।

 

बैठक में CWC से दिग्विजय कुमार, CPO चन्दरदीप कुमार, चाइल्ड हेल्पलाइन से खुशबू कुमारी, RPF, GRP, SSB रक्सौल, न्याय नेटवर्क, ममता माहेर निवास और स्वच्छ रक्सौल सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

 

बैठक में शामिल एजेंसियों और संस्थाओं ने बाल तस्करी, बाल भिक्षावृत्ति, असुरक्षित पलायन और बच्चों के शोषण की रोकथाम के लिए आपसी सूचना तंत्र को मजबूत करने तथा जरूरत पड़ने पर त्वरित समन्वित कार्रवाई पर जोर दिया।

 

रक्सौल जैसे अंतरराष्ट्रीय सीमावर्ती क्षेत्र में बच्चों की सुरक्षा के लिए रेलवे स्टेशन से लेकर सीमा क्षेत्र तक सतर्कता महत्वपूर्ण मानी गई। बैठक का प्रमुख संदेश रहा कि रेलवे और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी, चाइल्ड हेल्पलाइन की त्वरित सक्रियता, CWC का संरक्षण तंत्र और सामाजिक संगठनों की जमीनी पहुंच एक साथ काम करें, तभी मानव तस्करी के खिलाफ बच्चों के लिए प्रभावी सुरक्षा कवच तैयार किया जा सकता है।

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