गुरुदेव भगवान श्रीकृष्ण ही इस सृष्टि के परम मित्र हैं: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

गुरुदेव भगवान श्रीकृष्ण ही इस सृष्टि के परम मित्र हैं: आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज

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“सादर जय सियाराम”

आज 02 ,अगस्त रविवार 2026 ,

“आज अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस है”

अंतरराष्ट्रीय दिवस के पावन सुअवसर पर आप सभी आदरणीय भक्तगण , एवं शिष्यगण को

🌼 अतंराष्ट्रीय मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं मंगलकामनाएं , सच्चे हृदय से हार्दिक शुभकामनाएं ।

सादर जय सियाराम ,

इस मित्रता दिवस पर मुझे एक गीता का श्लोक स्मरण आ गया , अर्थात भगवान की वाणी स्मरण में आया :

“सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति”

श्रीमद्भगवद्गीता 5.29

अर्थात: “जो मुझे सभी प्राणियों का परम मित्र और हितैषी जान लेता है ,

वो शांति को प्राप्त होता है ।

वो शांति को पाता है”

जीव का परम हितैषी संत और भगवंत अलावा कोई तीसरा नहीं है ।

आप हमारे जीवन में शांति हैं ।

आपके साथ प्रसन्नता , आपकी हंसी , आपकी सलाह- हमारा मानना है ।

ये सब हमारे लिए ईश्वर का प्रसाद है ।

आप सब हमारे लिए ईश्वर का प्रसाद है ।

“आज 02 अगस्त 2026, मित्रता दिवस पर बस इतना ही कहूंगा-

दुनिया में परम मित्र तो श्रीकृष्ण हैं ।

पर उनके बाद अगर कोई मित्र है ।

तो आप सब है ।

गुरुदेव भगवान श्रीकृष्ण ही इस सृष्टि के परम मित्र हैं ।

और आप सभी…आप सभी हमारे जीवन में भगवान के भेजे हुए “कृष्ण रुपी मित्र हैं ।

गुरु-शिष्य का संबंध भी मित्रता का सबसे पवित्र रुप है ।

गुरुदेव के प्रति शिष्य का समर्पण , गुरुदेव के प्रति शिष्य की सेवा , गुरुदेव के प्रति शिष्य की श्रद्धा ये सब देखकर मन बहुत गदगद हो जाता है ।

“एक अच्छा गुरुदेव अनन्त मित्रों के बराबर होता है ।

गुरुदेव मिल जाए तो मित्र खोजने की आवश्यकता नहीं होगी ।

गुरुदेव , गुरु और शिष्य का रिश्ता दुनिया का सबसे पवित्र मित्रता का रिश्ता है ।

गुरु अपने शिष्य का सदैव हित चाहता है ।

बिना कुछ मांगे ।

और शिष्य भी अपने पूज्य गुरुदेव भगवान की आज्ञा में कल्याण देखता है ।

ठीक वैसे ही जैसे भक्त और भगवान का रिश्ता ।

आप सब हमारे जीवन में भगवान का प्रसाद है ।

मित्रता की सबसे ऊंची परिभाषा : जो बिना स्वार्थ के आपका हित चाहे ।

जो सुख में ताली बजाएं और दुःख में कंधा भी दे ।

और मेरे लिए आप वो वरदान हैं जो भगवान ने भेजे हैं ।

बस ऐसे ही साथ बने रहना ।

अंत में बस इतना ही –

मित्रता का मतलब साथ निभाना ।

और मित्रता मतलब… भगवान की तरह निस्वार्थ होना ।

आप सभी को मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ।

ईश्वर आप सभी की मित्रता को अटूट बनाए रखे ।

आप सभी को मित्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!”

[आचार्य श्री पुरुषोत्तम दास त्यागी जी महाराज]

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